केंद्र सरकार BRICS शिखर सम्मेलन के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। यह कदम संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिशों का हिस्सा है।
- महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को पारित करने के लिए विशेष सत्र की संभावना।
- BRICS शिखर सम्मेलन के बाद निर्णय लिया जा सकता है; नवरात्रि के दौरान सत्र की योजना संभव।
- लोकसभा में 360 और राज्यसभा में 164 सदस्यों के विशेष बहुमत की आवश्यकता।
नई दिल्ली स्थित सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक को पारित करने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाने का विकल्प खुला रखे हुए है। गौरतलब है कि मानसून सत्र को अभी तक स्थगित (prorogue) नहीं किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि सरकार अभी भी विधायी कार्यों को पूरा करने के अवसर तलाश रही है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो सरकार इसे नवरात्रि के दौरान आयोजित करने पर विचार कर सकती है। इसका मुख्य कारण देवी दुर्गा की पूजा और महिला सशक्तिकरण का प्रतीकात्मक महत्व है, जो महिला आरक्षण विधेयक के मूल उद्देश्य के साथ मेल खाता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम केवल विधायी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है। परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को न केवल अपने सहयोगियों बल्कि विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों के समर्थन की भी आवश्यकता है। विशेष बहुमत (Two-thirds majority) प्राप्त करना एक कठिन चुनौती रही है, लेकिन हालिया राजनीतिक समीकरणों ने इस राह को आसान बना दिया है।
संवैधानिक संशोधनों के लिए आवश्यक विशेष बहुमत प्राप्त करना भारतीय लोकतंत्र में एक कठिन परीक्षा है, और सरकार अब रणनीतिक गठबंधन के माध्यम से इसे हासिल करने की कोशिश कर रही है।
ऐतिहासिक रूप से, परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक को 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के हिस्से के रूप में पेश किया गया था। अप्रैल में आयोजित तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान, यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा था। उस समय भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी।
हालांकि, अब स्थिति बदल गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की स्थिति और कांग्रेस के साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बीच बढ़ते मतभेदों ने भाजपा के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। सरकार अब DMK के 22 सांसदों के समर्थन की संभावना तलाश रही है, हालांकि तमिलनाडु में परिसीमन एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
| सदन (House) | आवश्यक विशेष बहुमत (Special Majority) | उद्देश्य (Objective) |
|---|---|---|
| लोकसभा | 360 सांसद | संवैधानिक संशोधन पारित करना |
| राज्यसभा | 164 सांसद | संवैधानिक संशोधन पारित करना |
महिला आरक्षण विधेयक का लक्ष्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी शर्त यह है कि इसका कार्यान्वयन परिसीमन अभ्यास और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के बाद ही संभव होगा, जिससे यह मुद्दा और अधिक जटिल हो जाता है।
Frequently Asked Questions
1. महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है।
2. विशेष सत्र बुलाने के लिए क्या शर्त है?
सरकार इस सत्र को तब बुलाएगी जब उसे विश्वास होगा कि वह संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लेगी।