भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने कहा है कि दोनों देशों के संबंध अब केवल 'रीसेट' तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक नए और मजबूत युग की ओर बढ़ रहे हैं।

  • भारत और कनाडा के संबंध अब 'रीसेट' के दौर से आगे बढ़कर पुनर्निर्माण के चरण में हैं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा की यात्रा कर सकते हैं, जहाँ CEPA (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते) की घोषणा होने की उम्मीद है।
  • निज्जर मामले पर सुरक्षा संवाद में प्रगति हुई है और लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित करने से माहौल सुधरा है।
  • कनाडा अब अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम कर भारत के साथ अपने रिश्तों को विविधता देना चाहता है।

एक महत्वपूर्ण राजनयिक विकास में, भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली और ओटावा के बीच संबंध अब केवल 'रीसेट' (पुनर्स्थापना) के स्तर से कहीं आगे निकल चुके हैं। The Hindu MIND कार्यक्रम के दौरान बातचीत करते हुए, कूटर ने कहा कि खालिस्तानी कार्यकर्ता की हत्या के आरोपों के कारण आए गंभीर तनाव के बाद, अब दोनों देश आपसी विश्वास को फिर से स्थापित कर रहे हैं।

पिछले कुछ समय में दोनों देशों ने अपने दूतावासों को फिर से पूरी क्षमता से संचालित करना शुरू कर दिया है। कूटर के अनुसार, पिछले 80 वर्षों के राजनयिक संबंधों में ऐसा समय पहले कभी नहीं आया जब वैश्विक परिस्थितियां—जैसे यूक्रेन और पश्चिम एशिया युद्ध, जलवायु परिवर्तन और AI की चुनौतियां—दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाने के लिए प्रेरित कर रही हों।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह सुधार केवल राजनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से आर्थिक भी है। कनाडा के लिए, भारत की ओर बढ़ना अपने व्यापारिक पोर्टफोलियो में विविधता लाने का एक सोचा-समझा कदम है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की अनिश्चित व्यापार नीतियों के बीच, कनाडा अब 'एक ही टोकरी में सभी अंडे' (एक ही देश पर निर्भरता) रखने की रणनीति को छोड़कर भारत जैसे बड़े बाजार की तलाश कर रहा है।

दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कनाडा यात्रा एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस यात्रा के दौरान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की घोषणा होने की प्रबल संभावना है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में भारी वृद्धि होगी। गौरतलब है कि कनाडाई पेंशन फंड और अन्य संस्थागत निवेशकों ने पहले ही भारत में लगभग 80 अरब डॉलर का निवेश किया है।

राजनयिक शत्रुता से रणनीतिक साझेदारी की ओर यह बदलाव यह दर्शाता है कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में वैचारिक मतभेदों की तुलना में भू-राजनीतिक स्थिरता अधिक महत्वपूर्ण है।

सुरक्षा के मोर्चे पर, कूटर ने पुष्टि की कि निज्जर हत्या मामले पर हो रहे सुरक्षा संवाद में ठोस प्रगति हुई है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित करने के कनाडा के कदम ने माहौल को सकारात्मक बनाया है, जो भारत की सुरक्षा चिंताओं के प्रति कनाडा की गंभीरता को दर्शाता है।

हालांकि, कुछ मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। जब कूटर से यह पूछा गया कि क्या कनाडा को उन सार्वजनिक आरोपों के लिए भारत से माफी मांगनी चाहिए जिसने रिश्तों में दरार पैदा की थी, तो उन्होंने इस सवाल को टाल दिया। फिर भी, उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच की 'केमिस्ट्री' इतनी मजबूत है कि यह किसी भी सरकारी परिवर्तन के बाद भी कायम रहेगी।

क्या आप जानते हैं?: सिंगापुर और यूएई के साथ-साथ कनाडा भी भारत में सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में से एक है, जिसका कुल निवेश लगभग 80 अरब डॉलर है।
विशेषता पिछला चरण (तनाव) वर्तमान चरण (सुधार)
राजनयिक उपस्थिति मिशनों में कटौती पूर्ण क्षमता वाले दूतावास
सुरक्षा दृष्टिकोण सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप सुरक्षा संवाद और आतंकी लिस्टिंग
व्यापारिक दृष्टिकोण स्थिर/तनावपूर्ण CEPA वार्ता और विविधीकरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी कनाडा का दौरा कब करेंगे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में कनाडा जाने की उम्मीद है, जो उनकी उत्तरी अमेरिका यात्रा और G20 शिखर सम्मेलन का हिस्सा होगा।

CEPA क्या है?
CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) एक व्यापार समझौता है जिसका उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच टैरिफ को कम करना और व्यापार एवं निवेश को बढ़ाना है।