ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेताओं, जिनमें मीरवाइज़ उमर फारूक शामिल हैं, ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन के साथ महत्वपूर्ण बातचीत की।

  • मीरवाइज़ उमर फारूक और शिया उलेमा आगा सैयद हसन मोसवी अल सफवी और इमरान रज़ा अंसारी ने ईरानी राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से मुलाकात की।
  • नेताओं ने ईरानी दूतावास द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी में भाग लिया, जो मीनाब (ईरान) में मारे गए बच्चों को समर्पित थी।
  • यह मुलाकात नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के इतर हुई।

एक महत्वपूर्ण राजनयिक और धार्मिक घटनाक्रम में, जम्मू-कश्मीर के तीन प्रमुख धार्मिक नेताओं—मीरवाइज़ उमर फारूक, आगा सैयद हसन मोसवी अल सफवी और इमरान रज़ा अंसारी—ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक बैठक की। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन के साथ बातचीत करना था, जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारतीय राजधानी में मौजूद हैं।

राष्ट्रपति के साथ औपचारिक बैठक के अलावा, मीरवाइज़ और इमरान रज़ा अंसारी ने ईरानी दूतावास द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी का दौरा किया। यह प्रदर्शनी मीनाब, ईरान में अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि देने के लिए लगाई गई थी। यह कदम पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संघर्षों के संबंध में ईरानी राज्य के साथ उनके वैचारिक जुड़ाव और एकजुटता को दर्शाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि कश्मीर की सबसे प्रभावशाली धार्मिक आवाजों का ईरानी दूतावास के कार्यक्रम में शामिल होना कश्मीर घाटी और इस्लामी दुनिया के बीच स्थायी सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को रेखांकित करता है। मीनाब त्रासदी के संबंध में ईरान के नैरेटिव का समर्थन करके, ये नेता स्थानीय राजनीति से ऊपर उठकर मध्य पूर्व में मानवाधिकारों और संप्रभुता पर वैश्विक विमर्श में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

धार्मिक नेतृत्व और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का मिलन अक्सर संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों में जमीनी भावनाओं को प्रभावित करने के लिए एक सॉफ्ट-पावर उपकरण के रूप में कार्य करता है।।

इस कार्यक्रम की मेजबानी भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फताली ने की। कार्यक्रम में धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के बीच एक औपचारिक चर्चा सत्र हुआ, जिसके बाद एक रात्रिभोज का आयोजन किया गया। यह आयोजन मुस्लिम दुनिया के प्रभावशाली व्यक्तित्वों, विशेष रूप से कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र के नेताओं के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने की ईरान की रणनीति को उजागर करता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कश्मीरी धार्मिक नेतृत्व और ईरानी कूटनीति के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से साझा धार्मिक दृष्टिकोण और इस्लामी क्षेत्रों की स्थिरता में पारस्परिक रुचि पर आधारित रहे हैं। ईरान अक्सर अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करता रहा है, और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दूतावास के कार्यक्रम में मीरवाइज़ की उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय मंच पर दृश्यता बनाए रखने के एक सोचे-समझे प्रयास का संकेत देती है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन दुनिया के सबसे शक्तिशाली आर्थिक मंचों में से एक है, जिसका उद्देश्य वैश्विक शक्ति संतुलन को उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ओर स्थानांतरित करना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कश्मीरी नेता नई दिल्ली में क्यों थे?
उन्हें ईरानी राजदूत द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन के साथ बातचीत करने के लिए आमंत्रित किया गया था।

प्रश्न 2: उन्होंने जिस प्रदर्शनी में भाग लिया उसका उद्देश्य क्या था?
प्रदर्शनी का आयोजन ईरान के मीनाब में अमेरिकी और इजरायली हमलों में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था।