प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक संस्थानों में तत्काल सुधार की मांग की और 'ग्लोबल साउथ' को नियम मानने वाले के बजाय नियम बनाने वाला बनने का आह्वान किया।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलने का आह्वान किया।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता।
  • संस्थागत गति बनाए रखने के लिए 'ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र' का प्रस्ताव।
  • वैश्विक वित्तीय निकायों में मतदान शक्ति के पुनर्गठन की मांग।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित 20वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एक बुनियादी बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान बहुपक्षीय संस्थान पुराने समय की याद दिलाते हैं और वे आज की वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ग्लोबल साउथ को अब केवल दूसरों द्वारा बनाए गए नियमों का पालन नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे इन नियमों को आकार देने वाली शक्ति बनना चाहिए।

अपने संबोधन के दौरान, पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सुधार अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक दुनिया की सबसे शक्तिशाली संस्था में प्रतिनिधित्व का संतुलन नहीं होगा, तब तक वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रयास अधूरे रहेंगे। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान 30 शहरों में 350 से अधिक बैठकों के माध्यम से 'मानवता-प्रथम' और 'जन-केंद्रित' दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत का यह रुख न केवल अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है, बल्कि यह विकासशील देशों के एक स्वाभाविक नेता के रूप में उभरने की रणनीति है। 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को हटाने की बात करना सीधे तौर पर पश्चिमी प्रभुत्व वाली व्यवस्था को चुनौती देना है और एक अधिक लोकतांत्रिक वैश्विक शासन की मांग करना है।

"भारत का ब्रिक्स विजन केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सत्ता के संतुलन को पुनर्व्यवस्थित करने का एक रणनीतिक प्रयास है।"

संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए, प्रधानमंत्री ने एक 'ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र' (BRICS continuity and implementation mechanism) का प्रस्ताव रखा। इसमें एक ट्रोइका फॉलो-अप फ्रेमवर्क और एक सुरक्षित डिजिटल रिपोजिटरी शामिल होगी, ताकि पिछले निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वैश्विक शासन के लिए दस-बिंदु रोडमैप पेश किया, जिसमें वित्तीय निकायों में वोटिंग पावर के पुनर्गठन और नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क का निर्माण शामिल है।

यह संबोधन 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए संयुक्त राष्ट्र दिवस' के साथ मेल खाता है। पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि एक साझा वैश्विक भविष्य के लिए निर्णय लेने की शक्ति का साझा होना अनिवार्य है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स (BRICS) समूह की शुरुआत मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत और चीन के रूप में हुई थी, जिसमें बाद में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ और अब इसका विस्तार और अधिक देशों तक हो चुका है।

Frequently Asked Questions

1. पीएम मोदी ने 'विशेषाधिकार के पिरामिड' से क्या तात्पर्य किया?
इसका तात्पर्य उस पुरानी वैश्विक व्यवस्था से है जहाँ कुछ शक्तिशाली देश ही सारे नियम तय करते हैं और बाकी दुनिया को उन्हें मानना पड़ता है।

2. ब्रिक्स निरंतरता तंत्र क्या है?
यह एक प्रस्तावित ढांचा है जो यह सुनिश्चित करेगा कि शिखर सम्मेलनों में लिए गए निर्णय केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका कार्यान्वयन हो।