त्रावणकोर देवस्वोम एम्प्लॉइज फ्रंट ने मुख्यमंत्री और देवस्वोम मंत्री को शिकायत भेजकर चेतावनी दी है कि तैयारियों में देरी से मंदिर के रीति-रिवाजों और कर्मचारियों के वेतन पर बुरा असर पड़ सकता है।
- कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि धीमी टेंडर प्रक्रिया से देवस्वोम बोर्ड की वित्तीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
- क्लास IV कर्मचारियों के लिए शिफ्ट सिस्टम और मेस में भोजन की गुणवत्ता सुधारने की मांग।
- ई-टेंडरिंग प्रक्रिया में ठेकेदारों की डिजिटल साक्षरता की कमी पर चिंता जताई गई।
सबरीमाला में वार्षिक मंडला-मकरविलाकु तीर्थयात्रा सीजन से पहले, त्रावणकोर देवस्वोम एम्प्लॉइज फ्रंट ने टेंडर प्रक्रिया और तैयारियों की धीमी गति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कर्मचारियों के संगठन ने मुख्यमंत्री और देवस्वोम मंत्री को शिकायत सौंपते हुए कहा है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो आगामी सीजन के दौरान श्रद्धालुओं और जनता के सामने विभाग की भारी किरकिरी होगी।
इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र मंदिर की वित्तीय व्यवस्था है। तीर्थयात्रा सीजन के दौरान प्राप्त होने वाला राजस्व बोर्ड के तहत मंदिर कर्मचारियों के दैनिक खर्चों, वेतन और पेंशन का मुख्य आधार होता है। यूनियन का तर्क है कि यदि प्रबंधन में खामियों के कारण राजस्व में गिरावट आती है, तो इसका सीधा असर मंदिर के पवित्र रीति-रिवाजों के संचालन और कर्मचारियों के भुगतान पर पड़ेगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक प्रणालीगत जोखिम है। तीर्थयात्रा के एक छोटे से समय अंतराल पर अत्यधिक निर्भरता देवस्वोम बोर्ड को संवेदनशील बनाती है। यदि दुकानों और सेवाओं के टेंडर समय पर नहीं होते हैं, तो बोर्ड को अपने सामान्य कोष (General Fund) से पैसा खर्च करना पड़ेगा, जिसके गंभीर दीर्घकालिक वित्तीय परिणाम हो सकते हैं।
वित्तीय मुद्दों के अलावा, कर्मचारियों के जीवन स्तर पर भी सवाल उठाए गए हैं। कई वर्षों से शिकायतें हैं कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को मेस में घटिया गुणवत्ता का भोजन दिया जाता है। फ्रंट ने मांग की है कि पुलिस मेस की तर्ज पर एक उचित मेनू तैयार किया जाए और इसे सख्ती से लागू किया जाए ताकि 66 दिनों की कठिन ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों का स्वास्थ्य प्रभावित न हो।
"पारंपरिक तीर्थयात्रा प्रबंधन और आधुनिक ई-गवर्नेंस का मेल ही वह बिंदु है जहाँ सबरीमाला प्रशासन वर्तमान में विफल हो रहा है, जिससे राजस्व और कर्मचारी कल्याण दोनों खतरे में हैं।"
इसके अलावा, डिजिटल प्रणालियों की ओर बढ़ने से एक नई चुनौती पैदा हुई है। ई-टेंडर और ई-नीलामी में भाग लेने वाले कई ठेकेदारों के पास कंप्यूटर का सीमित ज्ञान है। यूनियन ने मांग की है कि संभावित बोलीदाताओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि तकनीकी बाधाओं के कारण अनुभवी ठेकेदार बाहर न हो जाएं।
प्रशासनिक शिकायतों में कर्मियों के स्थानांतरण (Transfer) का मुद्दा भी शामिल है। आरोप है कि सामान्य स्थानांतरण के चार महीने बाद भी क्लर्कों और अन्य कर्मचारियों की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। साथ ही, यह आरोप भी लगाया गया है कि पिछले 10 वर्षों से 'अरावना बफर स्टॉक' ड्यूटी में केवल वामपंथी संघ से जुड़े कर्मचारियों को ही प्राथमिकता दी गई है, जिसे इस वर्ष स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: मंदिर के लिए टेंडर प्रक्रिया इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
तीर्थयात्रा सीजन के दौरान टेंडरों और लाइसेंसों से प्राप्त राजस्व पूरे वर्ष के लिए वेतन, पेंशन और दैनिक पूजा खर्चों का मुख्य स्रोत होता है।
प्रश्न 2: क्लास IV कर्मचारियों के लिए क्या मांगें की गई हैं?
यूनियन ने 66 दिनों की निरंतर ड्यूटी को समाप्त करने और कर्मचारियों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए शिफ्ट सिस्टम लागू करने की मांग की है।