परम्बिकुलम-अलियार समझौते के उल्लंघन के कारण चित्तूर क्षेत्र के किसानों को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे फसल बर्बाद होने का खतरा है।
- तमिलनाडु द्वारा समझौते के अनुसार पानी न छोड़ने से 50,000 एकड़ भूमि पर खेती खतरे में है।
- अनुमानित ₹150 करोड़ का नुकसान होने की संभावना है।
- परम्बिकुलम जलाशयों में पर्याप्त पानी होने के बावजूद केवल 100 क्यूबिक फीट पानी छोड़ा जा रहा है।
केरल के चित्तूर क्षेत्र के किसान वर्तमान में एक गंभीर कृषि संकट का सामना कर रहे हैं। पूर्व बिजली मंत्री के. कृष्णकुट्टी ने आरोप लगाया है कि तमिलनाडु सरकार परम्बिकुलम-अलियार समझौते के तहत केरल के हिस्से का पानी छोड़ने में विफल रही है। इस जल संकट ने धान की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे हजारों किसानों की आजीविका दांव पर लग गई है।
शनिवार को मीडिया को संबोधित करते हुए, श्री कृष्णकुट्टी ने खुलासा किया कि वर्तमान 15-दिवसीय अवधि के दौरान केरल को 400 क्यूबिक फीट पानी मिलना चाहिए था, लेकिन चित्तूर नदी में केवल 100 क्यूबिक फीट पानी ही छोड़ा जा रहा है। यह भारी कमी न केवल समझौते का उल्लंघन है, बल्कि कृषि क्षेत्र के लिए एक आपदा भी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अंतरराज्यीय जल विवाद केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं हैं, बल्कि ये सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। यदि पानी की आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं की गई, तो यह संकट बड़े पैमाने पर पलायन और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है।
समझौते का उल्लंघन न केवल किसानों को बर्बाद कर रहा है, बल्कि दो राज्यों के बीच विश्वास की कमी को भी गहरा कर रहा है।
इस जल संकट के कारण लगभग 50,000 एकड़ भूमि पर खेती को छोड़ना पड़ा है, जिससे लगभग ₹150 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जो धान के खेत पहले ही बो दिए गए हैं, वे भी फसल के एक महत्वपूर्ण चरण में सूखने के कगार पर हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
परम्बिकुलम-अलियार परियोजना दोनों राज्यों के बीच जल साझाकरण का एक महत्वपूर्ण आधार है। ऐतिहासिक रूप से, पानी की कमी के दौरान, दोनों राज्यों के बीच उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के माध्यम से समाधान निकाले जाते रहे हैं। पूर्व में, नहरों के माध्यम से सीधे अलियार जलाशय में पानी भेजकर संकट को टाला गया था, लेकिन इस बार स्थिति काफी अलग और गंभीर दिखाई दे रही है।
श्री कृष्णकुट्टी ने राज्य सरकार की निष्क्रियता की आलोचना करते हुए मांग की है कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री स्तर पर उठाया जाए। उन्होंने कहा कि परम्बिकुलम घटकों में लगभग 3.7 tmc पानी उपलब्ध है, फिर भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।
Frequently Asked Questions
1. चित्तूर के किसान किस समस्या का सामना कर रहे हैं?
किसान पानी की कमी के कारण अपनी धान की फसल खो रहे हैं और भारी आर्थिक नुकसान का सामना कर रहे हैं।
2. समझौते के तहत कितना पानी मिलना चाहिए था?
समझौते के अनुसार 400 क्यूबिक फीट पानी मिलना चाहिए था, लेकिन केवल 100 क्यूबिक फीट ही दिया जा रहा है।