पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी ने पिछले बाएँ और तृणमूल कांग्रेस सरकारों को सनातन संस्कृति को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बाएँ ने धर्म को ‘ऑपियम’ कहा और टीएमसी ने बंगाल को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ बनाने की कोशिश की।
- सुवेन्दु अधिकारी ने बाएँ और टीएमसी को सांस्कृतिक ध्वंस का आरोप लगाया
- टीएमसी को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ बनाने की कोशिश करने का दावा
- सनातन परम्पराओं की पुनर्स्थापना के लिए नई सरकार का संकल्प
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी ने शनिवार को कोलकाता के केस्टोपुर में गणेश पूजा पंडाल का उद्घाटन करते हुए पिछले बाएँ मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकारों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि दोनों शासनों ने राज्य की सनातन परम्पराओं को नष्ट करने की कोशिश की।
अधिकारियों के अनुसार, बाएँ सरकार (१९४८‑१९८२) ने धर्म को "ऑपियम" कहा और पूजा मंडपों के बाहर कार्ल मार्क्स व व्लादिमीर लेनिन की पुस्तकें रखी जाती थीं, जबकि स्वामी विवेकानंद या लोकेनाथ बाबा की रचनाएँ नहीं दिखायी देती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस अवधि में हनुमान चालीसा या भगवद गीता जैसी धार्मिक ग्रंथों को नहीं दिखाया जाता था।
टीएमसी के १५ साल के शासन (२०११‑२०२६) के दौरान, अधिकारी ने कहा कि राज्य को "जामाती" बनाने की कोशिश की गई, जिससे बंगाल को "ग्रेटर बांग्लादेश" में बदलने की योजना बनाई गई। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि दुर्गा पूजा के विसर्जन को मुहर्रम के साथ मिलाने के लिए बदल दिया गया, जिससे परम्परागत पंजीका का उल्लंघन हुआ।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल का इतिहास १९४७ में भारत के विभाजन से गहरा जुड़ा है। कई हिन्दू परिवारों को पूर्व बंगाल (अब बांग्लादेश) से भागना पड़ा, जिसमें मुख्यमंत्री के माता-पिता भी शामिल हैं, जिन्होंने बारिसाल से भाग कर केवल कपड़े पहने ही अपने जीवन को बचाया। इस दर्दनाक इतिहास ने राज्य में सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की आवश्यकता को बढ़ावा दिया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the narrative of cultural erosion versus revival can significantly influence voter sentiment in West Bengal, especially ahead of the upcoming state elections. The framing of “Greater Bangladesh” taps into long‑standing communal anxieties, while the emphasis on Sanatan traditions aims to consolidate a Hindu‑majority base.
"Political rhetoric that pits cultural identity against perceived external threats often reshapes electoral landscapes," says Dr. Arvind Sharma, political sociologist.
Frequently Asked Questions
Q1: क्या पिछले शासनों ने वास्तव में दुर्गा पूजा के विसर्जन को बदल दिया था?
A1: अधिकारी का दावा है कि अंतिम टीएमसी अवधि में विसर्जन को मुहर्रम के साथ समन्वयित करने की कोशिश की गई, लेकिन इस कदम की आधिकारिक दस्तावेज़ी पुष्टि अभी तक नहीं मिली है।
Q2: नई सरकार सनातन परम्पराओं को कैसे संरक्षित करने की योजना बनाती है?
A2: मुख्यमंत्री ने सभी प्रमुख धार्मिक उत्सवों को पारंपरिक पंचांग के अनुसार आयोजित करने और सांस्कृतिक शिक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का वादा किया है।