प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के 'हथियारीकरण' के खिलाफ चेतावनी दी। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा डीएम द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने और राहुल गांधी के खान-पान संबंधी बयान ने सुर्खियां बटोरीं।
- पीएम मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में तकनीक और खनिजों के दुरुपयोग पर चेतावनी दी।
- ग्रेटर नोएडा डीएम ने छात्र की एनएसए हिरासत के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
- राहुल गांधी ने ब्रिक्स डिनर के बाद भारतीय खान-पान पर टिप्पणी की।
- अमित शाह ने इतिहास के 'वि-उपनिवेशीकरण' (Decolonisation) पर जोर दिया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: वैश्विक सुरक्षा पर मोदी का प्रहार
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की। उन्होंने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के 'हथियारीकरण' (Weaponisation) के खतरों को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ब्रिक्स के माध्यम से लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के चार स्तंभों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले व्यवधानों और जलवायु आपदाओं से निपटा जा सके।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 'ग्लोबल साउथ' का ब्रिक्स में विश्वास बढ़ा है, लेकिन वैश्विक तनावों के कारण आम लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। भारत का लक्ष्य एक ऐसी प्रणाली बनाना है जो महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हो।
कानूनी और राजनीतिक हलचल
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, ग्रेटर नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें एक दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा की अवैध एनएसए (NSA) हिरासत के मुआवजे के रूप में उनके और अन्य अधिकारियों के वेतन से 5 लाख रुपये वसूलने का निर्देश दिया गया था।
राजनीतिक गलियारों में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान परोसे गए पूर्ण शाकाहारी भोजन के जवाब में एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया। उन्होंने कहा कि 80% भारतीय मांसाहारी हैं और भारतीय मांसाहारी भोजन अत्यंत स्वादिष्ट होता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पीएम मोदी का बयान वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। तकनीक और खनिजों पर नियंत्रण अब केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गया है।
तकनीकी और खनिज संसाधनों का नियंत्रण भविष्य के युद्धों का आधार बन सकता है, जिसे रोकना अनिवार्य है।
ऐतिहासिक संदर्भ
ब्रिक्स (BRICS) समूह का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया था, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें विस्तार और नए भू-राजनीतिक आयाम जुड़ गए हैं, जिससे यह वैश्विक शक्ति संतुलन का केंद्र बन गया है।
Frequently Asked Questions
1. पीएम मोदी ने ब्रिक्स में क्या मुख्य चिंता जताई?
उन्होंने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के राजनीतिक या सैन्य हथियार के रूप में उपयोग किए जाने पर चिंता जताई।
2. ग्रेटर नोएडा डीएम ने सुप्रीम कोर्ट क्यों जाने का फैसला किया?
एक छात्र की अवैध हिरासत के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा वेतन से जुर्माना भरने के आदेश के विरोध में।