केरल में भीषण गर्मी का मौसम समाप्त हो चुका है, लेकिन राज्य अब भी बिजली कटौती के संकट से जूझ रहा है। कम मानसून, घटते जल स्तर और बढ़ती मांग ने राज्य की बिजली व्यवस्था को संकट में डाल दिया है।
- केरल की औसत दैनिक बिजली मांग सितंबर 2025 के 3,794 MW से बढ़कर 5,000 MW हो गई है।
- इडुक्की जलाशय में पानी की भारी कमी (47% घाटा) के कारण जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है।
- सौर ऊर्जा की प्रचुरता के बावजूद, रात के समय बिजली की कमी का मुख्य कारण ऊर्जा भंडारण (Battery Storage) की कमी है।
- मानसून की कमी और बढ़ते तापमान ने बिजली की मांग को चरम पर पहुंचा दिया है।
केरल में मानसून की वापसी में अब केवल कुछ ही सप्ताह शेष हैं, लेकिन राज्य एक असामान्य बिजली संकट का सामना कर रहा है। हालांकि भीषण गर्मी का दौर बीत चुका है, लेकिन राज्य के कई हिस्सों में रात के समय बिजली कटौती और प्रतिबंध देखे जा रहे हैं। केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) ने चरम घंटों के दौरान ऊर्जा मांग को प्रबंधित करने के लिए बिजली कटौती के उपाय लागू किए हैं।
बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति का गणित
KSEB के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में राज्य की औसत दैनिक बिजली मांग 5,000 मेगावाट (MW) तक पहुंच गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह केवल 3,794 MW थी। राज्य वर्तमान में केवल 4,200 MW की आपूर्ति कर पा रहा है, जिससे भारी अंतर पैदा हो गया है।
आपूर्ति के मोर्चे पर, केरल अपनी आवश्यकता का केवल 25% हिस्सा ही विभिन्न स्रोतों जैसे जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा से उत्पन्न करता है। इसकी तुलना में, पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश अपनी 86% मांग खुद पूरी करता है। केरल सौर ऊर्जा, विशेष रूप से रूफटॉप सोलर में अग्रणी है, लेकिन यहाँ एक बड़ी समस्या है: सौर ऊर्जा केवल दिन में उपलब्ध होती है, जबकि केरल में बिजली की मांग रात के समय सबसे अधिक होती है। ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) के अभी तक पूरी तरह चालू न होने के कारण यह सौर ऊर्जा रात के अंधेरे में काम नहीं आ पा रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केरल का संकट केवल उत्पादन की कमी नहीं, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन और भंडारण की विफलता का परिणाम है। राज्य की बढ़ती घरेलू मांग और सौर ऊर्जा के भंडारण की क्षमता के बीच का असंतुलन भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
केरल में बिजली संकट का मूल कारण नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन तो है, लेकिन उसे रात के लिए सुरक्षित रखने की तकनीक का अभाव है।
मानसून की विफलता और गिरता जल स्तर
इस वर्ष 'अल नीनो' (El Niño) प्रभाव के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहा है। केरल ने सितंबर के मध्य तक 26% की मौसमी वर्षा की कमी दर्ज की है। सबसे चिंताजनक स्थिति इडुक्की जिले में है, जहाँ जल स्तर में 47% की कमी आई है। इडुक्की, जो राज्य का सबसे बड़ा जलविद्युत जलाशय है, वहां पानी कम होने के कारण KSEB को जलविद्युत उत्पादन कम करना पड़ा है।
इसके अलावा, अगस्त के अंतिम सप्ताह से तापमान में अचानक वृद्धि (सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक) ने एयर कंडीशनर के उपयोग को बढ़ा दिया है। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के रात में चार्ज होने से आधी रात के बाद भी बिजली की मांग कम नहीं हो रही है।
| राज्य | स्वयं की मांग पूर्ति (%) | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| केरल | 25% | उच्च रूफटॉप सोलर, कम भंडारण |
| आंध्र प्रदेश | 86% | उच्च आत्मनिर्भरता |
| कर्नाटक | 60% | स्थिर आपूर्ति |
| तमिलनाडु | 50% | मिश्रित स्रोत |
Frequently Asked Questions
1. केरल में रात में बिजली कटौती क्यों होती है?
केरल में 75% उपभोक्ता घरेलू हैं, जिनकी मांग रात में सबसे अधिक होती है। सौर ऊर्जा रात में उपलब्ध नहीं होती और भंडारण क्षमता की कमी है।
2. क्या मानसून की कमी बिजली संकट का कारण है?
हाँ, कम बारिश के कारण बांधों में पानी का स्तर गिर गया है, जिससे जलविद्युत (Hydro power) उत्पादन कम हो गया है।