प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ब्रिक्स नेताओं के आउटरीच शिखर सम्मेलन में कहा कि ग्लोबल साउथ देशों का ब्रिक्स पर भरोसा बढ़ गया है क्योंकि उनकी आवाज़ें सुनी जा रही हैं और उनके अनुभवों का सम्मान किया जा रहा है। उन्होंने समूह की लचीलापन बढ़ाने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स आउटरीच शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ के भरोसे की वृद्धि पर प्रकाश डाला।
- ब्रिक्स समूह की लचीलापन को मजबूत करने के लिए कई नई पहलें घोषित की गईं।
- समूह के भीतर विविधता और सहयोग को भविष्य की स्थिरता का आधार माना गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स नेताओं के आउटरीच शिखर सम्मेलन में कहा कि ग्लोबल साउथ देशों का ब्रिक्स पर भरोसा बढ़ गया है क्योंकि इस मंच पर उनकी आवाज़ें सुनी जाती हैं और उनके अनुभवों का सम्मान किया जाता है।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का गठन 2009 में हुआ था, जिसका मूल उद्देश्य विकासशील देशों के आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को सुदृढ़ करना था। तब से समूह ने कई बार विस्तार किया है और अब यह वैश्विक बहध्रुवीयता का प्रमुख स्तंभ बन चुका है।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
समारोह में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशियन सहित कई विश्व नेता उपस्थित थे। मोदी ने कहा, “मैं व्यक्तिगत अनुभव से कह सकता हूँ कि ग्लोबल साउथ के देशों का ब्रिक्स में भरोसा बढ़ गया है, क्योंकि यहाँ उनकी आवाज़ें सुनी जाती हैं, उनके अनुभवों का सम्मान किया जाता है और समाधान उनके साथ मिलकर तैयार किए जाते हैं।”
उन्होंने यह भी बताया कि विश्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम लोगों की ज़िंदगी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस कारण भारत ने ब्रिक्स समूह के भीतर लचीलापन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है।
घोषित प्रमुख पहलें
- ब्रिक्स एकीकृत प्रारम्भिक चेतावनी प्रणाली (इन्फेक्टियस डिजीजेज़ के लिए)
- ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन सहयोग ढांचा
- ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क
- स्टार्ट‑अप इनोवेशन फंड
- ब्रिक्स MSME सहयोग पोर्टल
- डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्मार्ट ग्रिड्स एंड एनर्जी स्टोरेज
- अर्बन मोबिलिटी हब
- एग्रो‑इकोलॉजी और रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the rising confidence of Global South nations in BRICS signals a shift toward a more multipolar world order, where emerging economies gain greater influence over global governance.
ग्लोबल साउथ का भरोसा बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि ब्रिक्स अब केवल आर्थिक मंच नहीं, बल्कि विकासशील देशों के लिए रणनीतिक साझेदारी का केंद्र बन चुका है।
Frequently Asked Questions
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के भरोसे के बारे में क्या कहा?
- ब्रिक्स समूह की लचीलापन बढ़ाने के लिए कौन‑कौन सी नई पहलें घोषित की गईं?