संगुर जिले में फर्जी नामांकन और नकली उपस्थिति रिकॉर्ड के आरोप ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) को सूचित किया है। भाजपा और शिरोमानी अकाली दल ने एएपी सरकार पर इस कथित धोखाधड़ी के लिए जवाबदेही की मांग की है।

  • संगुर में फर्जी छात्र नामांकन और नकली उपस्थिति की रिपोर्ट
  • NCSC ने शिकायत स्वीकार कर जाँच का वादा किया
  • बीजेपी और शिरोमानी अकाली दल ने एएपी सरकार पर फंड दुरुपयोग का आरोप लगाया

पंजाब के संगुर जिले में फर्जी छात्रों के नामांकन और नकली उपस्थिति रिकॉर्ड के आरोपों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) को एक औपचारिक शिकायत भेजी है। इस घटना में कथित तौर पर छात्रवृत्ति, भोजन भत्ता और स्कूल अनुदान को उन छात्रों के नाम पर दावा किया गया है जो या तो स्कूल नहीं जाते थे या पहले ही छोड़ चुके थे।

किशोर माकवाना, NCSC के अध्यक्ष, ने भारत टुडे को बताया कि आयोग को इस मामले पर कई शिकायतें मिली हैं और यह “सबसे सख्त कार्रवाई” करेगा। उन्होंने एएपी सरकार पर SC छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने का आरोप भी लगाया।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यदि इन दावों को सत्य पाया जाता है तो यह पंजाब की शिक्षा नीति और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर गहरा असर डाल सकता है। फंड का दुरुपयोग न केवल आर्थिक नुकसान पहुँचाता है, बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य को भी कमजोर करता है।

“इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से सामाजिक न्याय का आधार कमजोर होता है,” कहते हैं शिक्षा नीति विशेषज्ञ डॉ. आर. पाटिल।
क्या आप जानते हैं? पंजाब में 2024 में जारी छात्रवृत्ति योजनाओं में केवल 15% फंड ही वास्तविक छात्रों तक पहुँच पाया था, जो इस दुरुपयोग की गंभीरता को दर्शाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या इस मामले की जाँच NCSC द्वारा ही की जाएगी?

हाँ, NCSC ने शिकायत पर तत्काल जांच शुरू करने का वादा किया है।

2. क्या एएपी सरकार पर पहले भी इसी तरह के आरोप लगे हैं?

पिछले वर्षों में पंजाब के शिक्षा विभाग पर कई बार फंड दुरुपयोग के आरोप लगे हैं, परंतु इस बार की व्यापकता पहले नहीं देखी गई।