मुंबई के ऐतिहासिक कामिठीपुरा क्षेत्र में 34 एकड़ के बड़े पुनर्विकास प्रोजेक्ट के साथ ही रेड लाइट व्यापार का स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है। पारंपरिक गलियों से निकलकर अब यह व्यापार शहर के बाहरी इलाकों और होटलों में स्थानांतरित हो रहा है।

  • मुंबई के कामिठीपुरा में 34 एकड़ के क्षेत्र का MHADA द्वारा क्लस्टर पुनर्विकास किया जा रहा है।
  • पुनर्विकास के कारण पारंपरिक कोठे अब व्यावसायिक इकाइयों और कारखानों में बदल रहे हैं।
  • सेक्स वर्क अब केंद्रित होने के बजाय नवी मुंबई, ठाणे और पालघर जैसे बाहरी इलाकों में फैल रहा है।
  • पुलिस के अनुसार, अब ग्राहकों और कामगारों को किसी निश्चित स्थान की आवश्यकता नहीं रही, वे होटल और लॉज का उपयोग कर रहे हैं।

मुंबई का सबसे चर्चित और विवादित इलाका, कामिठीपुरा, अब एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। पिछले सप्ताह घोषित 34 एकड़ के पुनर्विकास योजना के तहत, इस पुराने पड़ोस को आधुनिक गगनचुंबी इमारतों और व्यवस्थित आवासों में बदलने की तैयारी है। लेकिन इस शहरी परिवर्तन की एक गहरी मानवीय और सामाजिक कीमत भी है। जैसे-जैसे पुरानी इमारतें गिरेंगी, यहाँ का दशकों पुराना रेड लाइट व्यापार भी अपनी पारंपरिक पहचान खो रहा है।

पुनर्विकास का मतलब केवल नई इमारतें नहीं है, बल्कि यह उन हजारों महिलाओं के जीवन को भी अस्त-व्यस्त कर रहा है जो दशकों से यहाँ अपना जीवन यापन कर रही हैं। एक 50 वर्षीय महिला, जो दो दशक पहले कोलकाता से यहाँ आई थी, बताती है कि सरकार ने उन्हें पुनर्वास या उनके व्यवसाय के भविष्य के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। उनके लिए, यह केवल घर बदलने का मामला नहीं है, बल्कि आजीविका और सुरक्षा का सवाल है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी पुनर्विकास अक्सर अनौपचारिक अर्थव्यवस्थाओं को विस्थापित कर देता है। कामिठीपुरा का मामला दिखाता है कि कैसे 'शहरी सौंदर्यीकरण' के नाम पर समाज के सबसे हाशिए पर रहने वाले समूहों को अदृश्य कर दिया जाता है, जिससे शोषण का स्वरूप समाप्त होने के बजाय केवल बदल जाता है।

पुनर्विकास के कारण सेक्स वर्क का विखंडन हो रहा है, जिससे महिलाओं तक पहुँचने वाली सहायता प्रणालियाँ और भी कमजोर हो सकती हैं।

ऐतिहासिक रूप से, कामिठीपुरा का नाम 'कामठी' (तेलुगु भाषी मजदूर) से पड़ा है। औपनिवेशिक काल के दौरान ब्रिटिश प्रशासन ने 'Contagious Diseases Act, 1868' के माध्यम से इस क्षेत्र को विनियमित करने की कोशिश की थी। आज, यह क्षेत्र धीरे-धीरे बदल रहा है। 'प्रेरणा' संस्था की सह-संस्थापक प्रीति पाठक के अनुसार, 2011 में जहाँ 570 कोठे थे, वहीं 2025 तक इनकी संख्या घटकर 404 रह गई है। अब पुराने कोठों की जगह दर्जी की दुकानें और चमड़े के सामान बनाने वाली इकाइयाँ ले रही हैं।

बदलाव का सबसे बड़ा संकेत व्यापार के भौगोलिक विस्थापन में दिखता है। गणेश कोसुरी महाराज जैसे सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि पहले जहाँ 'लाल बाजार' की गलियाँ केंद्रित थीं, अब कामगार नवी मुंबई, ठाणे और पालघर के होटलों और लॉज में बिखरे हुए हैं। मुंबई पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, नवी मुंबई में रेस्क्यू ऑपरेशन की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो इस बात का प्रमाण है कि अनैतिक व्यापार अब खुले गलियों से निकलकर बंद कमरों में सिमट गया है।

Did You Know?: कामिठीपुरा का नाम उन तेलुगु मजदूरों से आया है जो हैदराबाद क्षेत्र से मुंबई में निर्माण कार्य के लिए आए थे।

Frequently Asked Questions

1. कामिठीपुरा पुनर्विकास योजना क्या है?
यह MHADA द्वारा संचालित एक क्लस्टर पुनर्विकास योजना है जिसका उद्देश्य 34 एकड़ के क्षेत्र में आधुनिक आवासीय टावर बनाना है।

2. रेड लाइट व्यापार का स्वरूप कैसे बदल रहा है?
यह अब गलियों और कोठों से हटकर शहर के बाहरी इलाकों के होटलों और लॉज में स्थानांतरित हो रहा है।