राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की कि महाराष्ट्र में सभी गिरजाघर और ईसाई मिशनरी संस्थाओं की जमीन का विस्तृत ऑडिट तीन महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य भर में गिरजाघर, ईसाई मिशनरी संस्थाओं और उनसे जुड़े संस्थानों की जमीन की स्वामित्व की विस्तृत जाँच का आदेश दिया है। यह कदम राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को विधानसभा में प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया तीन महीनों के भीतर समाप्त हो जाएगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

ऑडिट का उद्देश्य और दायरा

बावनकुले ने कहा कि इस जाँच का मुख्य लक्ष्य अवैध अतिक्रमण, विवादित जमीन के शीर्षक और स्वामित्व में अनियमितताओं की पहचान करना है। ब्रिटिश काल से लेकर स्वतंत्रता के बाद तक मिशनरी संस्थाओं द्वारा धारण की गई संपत्तियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी लेन‑देन मौजूदा कानूनों के अनुरूप हैं।

उच्चस्तरीय समिति की भूमिका

जांच एक उच्च‑शक्ति समिति द्वारा की जाएगी, जिसका नेतृत्व संबंधित प्रांतीय आयुक्त करेंगे। इस पैनल में सेटलमेंट कमिश्नर कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि और रजिस्ट्रेशन के इंस्पेक्टर जनरल शामिल होंगे। समिति को जमीन के दस्तावेज़, 7/12 उतार‑चढ़ाव और अन्य राजस्व रिकॉर्ड की गहन समीक्षा करने का आदेश है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संवेदनशीलता

भारत में ईसाई मिशनरी संस्थाओं द्वारा धारण की गई जमीन का इतिहास ब्रिटिश राज से जुड़ा हुआ है, जब कई मिशनरी स्कूल, अस्पताल और चर्चों को भूमि प्रदान की गई थी। स्वतंत्रता के बाद भी कई संपत्तियों का हक़ीकीकरण जारी रहा, परन्तु समय‑समय पर स्वामित्व संबंधी विवाद उत्पन्न होते रहे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र में दाएँ‑पंथी समूहों द्वारा धार्मिक सभा में उत्पीड़न के आरोपों ने इस मुद्दे को नई संवेदनशीलता दी है, जिससे सरकार को पारदर्शिता दिखाने की आवश्यकता महसूस हुई।

नियामकीय प्रभाव और संभावित परिणाम

यदि ऑडिट के दौरान अनियमितताएँ पाई जाती हैं, तो सरकार कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकती है और संदेहास्पद संपत्तियों को पुनः प्राप्त कर सकती है। दूसरी ओर, वैध शीर्षकों वाले संस्थानों को आश्वासन दिया गया है कि उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। इस पहल से भूमि प्रशासन को सुदृढ़ करने, अवैध अतिक्रमण को रोकने और निवेशकों के विश्वास को पुनर्स्थापित करने की उम्मीद है।

कृषि भूमि के नए नियम

ऑडिट के साथ ही, बावनकुले ने कृषि भूमि के लेन‑देन पर भी कड़ी शर्तें लागू करने का उल्लेख किया। अब केवल सिद्ध किसान ही कृषि भूमि खरीद सकेंगे, और उन्हें 7/12 उतार‑चढ़ाव जैसे राजस्व रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होंगे। यह कदम राज्य में कृषि भूमि के अतिक्रमण को रोकने और किसानों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

यह घोषणा एक सप्ताह बाद आई जब मुंबई में कई ईसाई समूहों ने पुलिस कमिश्नर से धार्मिक सभा में दायाँ‑पंथी समूहों द्वारा उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग की थी। इस संदर्भ में सरकार का यह कदम सामाजिक शांति और न्यायिक पारदर्शिता दोनों को संतुलित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।