जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा ने राष्ट्रीय कांग्रेस के एक विधायक को 20‑30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और राज्य की पुनर्स्थापना का वादा करके अपनी सरकार को गिराने की कोशिश की। यह आरोप 'ऑपरेशन लोटस' के रूप में सामने आया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • BJP ने राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायक को 20‑30 करोड़ रुपये की पेशकश की
  • ओमर अब्दुल्ला ने इसे 'ऑपरेशन लोटस' कहा
  • जम्मू‑कश्मीर में राज्यhood की माँग फिर से तीव्र हुई

जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने शनिवार को श्रीनगर में एक जनसभा में भाजपा‑नेतृत्व वाले केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील ने राष्ट्रीय कांग्रेस के एक विधायक को 20‑30 करोड़ रुपये, एक मंत्री पद और राज्यhood की पुनर्स्थापना का वादा कर राजनैतिक परिवर्तन की कोशिश की। यह आरोप 'ऑपरेशन लोटस' नामक रणनीति का हिस्सा बताया गया, जिससे भाजपा के राज्य‑स्तर पर विरोधी दलों को लुभाने की नीयत का संकेत मिलता है।

पृष्ठभूमि और 'ऑपरेशन लोटस' की अवधारणा

‘ऑपरेशन लोटस’ शब्द पहली बार 2019 में भारतीय राजनैतिक परिदृश्य में आया, जब भाजपा ने कई राज्य‑स्तर के नेताओं को पद, धन और सत्ता के बदले में उनके विरोध का त्याग करने की कोशिश की थी। इस रणनीति की आलोचना कई बार राष्ट्रीय और अंतर‑राज्यीय स्तर पर हुई है, क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को क्षति पहुँचाने की संभावना रखती है। ओमर अब्दुल्ला ने इस रणनीति को जम्मू‑कश्मीर में दोहराते हुए कहा कि भाजपा ने इसी तरह के वित्तीय प्रलोभन से अपनी सरकार को गिराने का लक्ष्य रखा।

अभियुक्त प्रस्ताव और उसकी वैधता

अभियुक्त प्रस्ताव के अनुसार, विधायक को 20‑30 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि, साथ ही एक मंत्री पद और राज्यhood की पुनर्स्थापना का वादा किया गया। अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया और कोई भी विधायक इस प्रलोभन को नहीं मानता। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे भाजपा 100 करोड़ रुपये भी दे, उनका दल अपने मूल्यों और जनता के विश्वास के साथ नहीं बदलेंगे। वर्तमान में राष्ट्रीय कांग्रेस के 41 विधायकों के साथ छह कांग्रेस विधायकों और पाँच स्वतंत्र तथा एक सीपीएम विधायकों का समर्थन है, जिससे सरकार के पास 46 में 46 से अधिक बहुमत है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह आरोप केंद्र‑राज्य तनाव को फिर से उभारेगा, विशेषकर जब जम्मू‑कश्मीर की राज्यhood की मांग बुनियादी अधिकार की तरह उभरी है। अब्दुल्ला ने कहा कि राज्यhood की माँग केवल राष्ट्रीय कांग्रेस या उनका परिवार नहीं, बल्कि पूरे जम्मू‑कश्मीर की जनता का मुद्दा है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को 20 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित प्रोटेस्ट में भाग लेने का आह्वान किया, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ेगी।

आगे का रास्ता

भविष्य में क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को कैसे पूरा करती है और क्या वह 'उपयुक्त समय' की स्पष्ट घोषणा करती है। अब्दुल्ला ने कहा कि धैर्य का मतलब चुप्पी नहीं, बल्कि सतत संवाद है, और उन्होंने सभी को प्रोटेस्ट में भाग लेने के लिए प्रेरित किया, ताकि जनता का आवाज़ सुनाई दे।