दिल्ली में विशेष गहन संशोधन (SIR) से पहले ही 13.39 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह संख्या पिछले कई महीनों की तुलना में कहीं अधिक है, जिससे चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

  • प्री-एसआईआर मैपिंग चरण के दौरान दिल्ली में 13.39 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए।
  • जनवरी 2026 में हुई कटौती 2025 के 11 महीनों की कुल कटौती से भी अधिक थी।
  • कुल मतदाता संख्या 1.56 करोड़ से घटकर 1.45 करोड़ रह गई है।
  • पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने इस प्रक्रिया को 'अभूतपूर्व' और 'असामान्य' बताया है।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली में विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही, यानी प्री-एसआईआर मैपिंग चरण में, लगभग 13.39 लाख मतदाताओं के नाम चुनावी रोल से हटा दिए गए हैं। यह संख्या देश के अन्य राज्यों की तुलना में अत्यधिक है, जहाँ वर्तमान में एसआईआर का तीसरा चरण चल रहा है।

डेटा का चौंकाने वाला विश्लेषण

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 के विधानसभा चुनावों के समय दिल्ली में 1.56 करोड़ मतदाता थे। जून 2026 तक, जब एसआईआर के लिए सूची को फ्रीज किया गया, यह संख्या घटकर 1.45 करोड़ रह गई। इसमें सबसे बड़ी गिरावट प्री-एसआईआर मैपिंग चरण के दौरान देखी गई, जहाँ कुल गिरावट का 93% हिस्सा इन्हीं पांच महीनों में हुआ।

विशेष रूप से, अप्रैल 2026 में अकेले 3.39 लाख नाम हटाए गए, जो कि किसी भी अन्य महीने की तुलना में बहुत अधिक है। यह विरोधाभास तब दिखता है जब हम 2025 के आंकड़ों को देखते हैं, जहाँ पूरे वर्ष में शुद्ध कटौती केवल 75,313 थी।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने इस प्रक्रिया को 'अत्यधिक असामान्य' और 'अभूतपूर्व' करार दिया है, और मांग की है कि चुनाव आयोग को इसके कारणों का खुलासा करना चाहिए।

क्यों चिंता का विषय है यह घटना?

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि मतदाता सूची में इस तरह की भारी गिरावट चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी नाम को हटाने से पहले सूचना जारी करना और सार्वजनिक रूप से नाम प्रदर्शित करना अनिवार्य है। हालांकि, प्री-एसआईआर चरण के दौरान हटाए गए नामों के लिए कोई अलग सूची या स्पष्ट कारण (जैसे मृत्यु, स्थानांतरण या डुप्लिकेट) सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और नियम

निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत, 'निरंतर अद्यतन' (Continuous Updation) की प्रक्रिया व्यक्तिगत आवेदन या फॉर्म-7 के माध्यम से होती है। इसमें बीएलओ (BLO) द्वारा सत्यापन और नोटिस जारी करना आवश्यक है। लेकिन इस मामले में, हजारों लोगों को पता ही नहीं चला कि उनका नाम सूची से हटा दिया गया है, जैसा कि कालकाजी की निवासी पूजा देवी के मामले में देखा गया।

क्या आप जानते हैं?: मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया में 'ASDD' (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) सूची का उपयोग किया जाता है, लेकिन प्री-मैपिंग चरण में इसका पारदर्शी उपयोग नहीं देखा गया।

Frequently Asked Questions

1. क्या मतदाता सूची में नाम हटने का कोई कारण बताया गया है?
प्री-एसआईआर मैपिंग चरण के दौरान हटाए गए नामों के लिए कोई विशिष्ट कारण या सार्वजनिक सूची जारी नहीं की गई है।

2. दिल्ली में मतदाताओं की संख्या में कितनी गिरावट आई है?
फरवरी 2025 से जून 2026 के बीच दिल्ली के मतदाताओं की संख्या में लगभग 11.01 लाख की शुद्ध कमी आई है।