दिल्ली कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के लिए पूर्व AAP काउंसिलर ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया। गवाहों के बयान और ‘सावेज़ी साक्ष्य’ के आधार पर हुसैन को ‘भारी हथियारबंद भीड़’ का हिस्सा माना गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ताहिर हुसैन को 2020 के दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो स्टाफर अंकित शर्मा की हत्या का दोषी पाया गया।
  • पाँच प्रत्यक्ष गवाहों ने हुसैन को भीड़ में सक्रिय रूप से देखे जाने की पुष्टि की।
  • अदालत ने कहा कि unlawful assembly में भाग लेने वाले किसी भी समझदार व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि प्रतिद्वंद्वी समुदाय के सदस्य मारें जा सकते हैं।

नई दिल्ली के एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, प्रवीण सिंह ने 15 जुलाई, 2026 को अपने फैसले में कहा कि अभियोजन ने "पर्याप्त साक्ष्य" के साथ यह सिद्ध किया है कि ताहिर हुसैन ने 25 फरवरी 2020 को चांद बाग पुलिया पर हुई भीड़ में भाग लिया और इंटेलिजेंस ब्यूरो के 26 वर्षीय कर्मी अंकित शर्मा को ‘भारी हथियारबंद’ समूह ने अपहृत कर मार दिया।

पृष्ठभूमि और घटना का क्रम

2020 के उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगे धार्मिक तनाव के कारण उत्पन्न हुए थे, जिसमें कई बार हिंसा, लूटपाट और जलाने की घटनाएँ दर्ज थीं। इस दौरान कई नागरिकों की जान गई, और अंकित शर्मा की हत्या ने इस हिंसा को एक नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया। न्यायालय ने इस मामले को "सामुदायिक द्वेष" के आधार पर वर्गीकृत किया, जहाँ बहु‑संख्या वाले समूह ने हिंसा को व्यवस्थित रूप से अंजाम दिया।

गवाहों की गवाही और प्रमाण

पाँच प्रमुख गवाहों – प्रदीप वर्मा, आकाश, उसके भाई भारत, दीपक प्रधान और अधिवक्ता प्रियांका गौर – ने बताया कि ताहिर हुसैन ने भीड़ को उकसाते हुए “हिंदुओं ने मुस्लिम घरों को जला दिया, महिलाओं को उत्पीड़ित किया” जैसा भाषण दिया। उन्होंने कहा कि भीड़ ने अंकित को चाकू, डंडे, ईंटें और लोहे की छड़ियों से कई बार पीटा और अंत में उसे नाली में फेंक दिया।

न्यायिक विश्लेषण और कानूनी महत्व

न्यायाधीश सिंह ने यह स्पष्ट किया कि “unlawful assembly” में भाग लेने वाला कोई भी समझदार व्यक्ति यह समझता है कि ऐसी स्थितियों में प्रतिद्वंद्वी समुदाय के व्यक्ति की जान जोखिम में हो सकती है। इस सिद्धांत के आधार पर, अदालत ने ताहिर हुसैन को सख्त सज़ा देने का आदेश दिया, जिससे भविष्य में समान मामलों में निवारक प्रभाव की आशा की गई है।

रक्षा पक्ष के तर्क और उनका खंडन

रक्षा ने कई गवाहों को “chance witnesses” या “stock witnesses” कहकर चुनौती दी, पर कोर्ट ने कहा कि वे केवल पास‑बाय‑पास के लोग नहीं थे, बल्कि घटनास्थल के निकट रहने वाले विश्वसनीय गवाह थे। उनके बयान में कोई महत्वपूर्ण विरोधाभास नहीं मिला, जिससे अभियोजन के केस की मजबूती और भी स्पष्ट हुई।

यह फैसला न केवल एक व्यक्तिगत हत्याकांड को न्याय दिलाता है, बल्कि सामुदायिक हिंसा को रोकने के लिए न्याय प्रणाली की दृढ़ता को भी दर्शाता है।