कैल्यन बनर्जी ने त्रिनामूल कांग्रेस के गिरने के मूल कारण के रूप में अभिषेक बनर्जी के कैमैक स्ट्रीट कार्यालय और I‑PAC को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि इस ‘इकोसिस्टम’ ने पार्टी की संरचना को कमजोर कर दिया और 2026 के विधानसभा चुनाव में असफलता में प्रमुख भूमिका निभाई।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कैल्यन बनर्जी ने कैमैक स्ट्रीट इकोसिस्टम को टीएमसी के पतन का प्रमुख कारण बताया
- I‑PAC की सलाहकार भूमिका ने पारम्परिक पार्टी संरचना को नष्ट किया
- रिताब्रताबानर्जी के नेतृत्व में विद्रोहियों ने 65 से अधिक विधायकों का समर्थन हासिल किया
कैल्यन बनर्जी, त्रिनामूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद, ने मंगलवार को अभिषेक बनर्जी के कैमैक स्ट्रीट कार्यालय और राजनीतिक सलाहकार फर्म I‑PAC को पार्टी के भीतर गहरी फटाव का मुख्य कारण घोषित किया। उन्होंने कहा कि इस इकोसिस्टम ने पार्टी के पारम्परिक कार्यकर्ता‑आधारित मॉडल को बदलकर एक ‘कंसल्टेंट‑ड्रिवेन’ ढाँचा बना दिया, जिससे पार्टी की आंतरिक शक्ति कमजोर हो गई।
पार्श्वभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
ट्रिनामूल कांग्रेस 1998 में ममता बनर्जी द्वारा स्थापित की गई थी और पश्चिम बंगाल में दो दशकों से अधिक समय तक सत्ता में रही। 2022 में अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के भीतर अपनी रणनीतिक भूमिका को सुदृढ़ किया, कैमैक स्ट्रीट में एक विशेष कार्यालय स्थापित किया और I‑PAC जैसे डेटा‑आधारित सलाहकार फर्म को नियुक्त किया। इस बदलाव ने प्रारम्भिक रूप से चुनावी जीतें दिलाई, परन्तु 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा।
I‑PAC की भूमिका और आलोचना
कैल्यन बनर्जी ने I‑PAC पर आरोप लगाया कि इस फर्म ने उम्मीदवार चयन, संसाधन वितरण और कार्यकर्ता पदोन्नति में अतिरिक्त हस्तक्षेप किया, जिससे अनुभवी पार्टी कार्यकर्ताओं को बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा, “राजनीति को सर्वेक्षण और डेटा एनालिटिक्स से नहीं, बल्कि जनता और कार्यकर्ताओं के निरंतर जुड़ाव से चलना चाहिए।” इस तरह के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि परामर्शदाता मॉडल ने पार्टी के भीतर भरोसे और वफादारी को क्षीण किया।
आंतरिक विद्रोह और वर्तमान स्थिति
रिताब्रताबानर्जी के नेतृत्व में विद्रोही समूह ने अब लगभग 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त किया है, जिसमें 20 सांसद भी शामिल हैं जिन्होंने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ गठबंधन किया। इस विभाजन ने पार्टी को दो अलग‑अलग कार्यक्रमों के साथ 21 जुलाई के शहीद दिवस समारोह मनाने की स्थिति में पहुँचा दिया है। कैल्यन बनर्जी ने कहा कि अभिषेक की ‘अहंकार’ और वरिष्ठ नेताओं के प्रति असम्मान ने इस संकट को तीव्र किया है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि टीएमसी इस आंतरिक विघटन को सुलझाने में विफल रहता है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनैतिक परिदृश्य में नई चुनौतियों को जन्म दे सकता है। विपक्षी दलों को इस अवसर का फायदा उठाने की संभावना है, जबकि ममता बनर्जी को अपने उत्तराधिकारी के चयन में पुनः विचार करना पड़ सकता है। इस तरह की पार्टी‑आधारित फटाव न केवल राज्य के राजनीतिक स्थिरता को बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डाल सकती है।