स्वरा भास्कर ने जंतर मंचर में 17वें दिन सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उनके भूख विरोध के लिए पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। इस कदम से विरोध के स्वास्थ्य जोखिम और नेतृत्व की माँगें और तेज़ हुईं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • स्वरा भास्कर ने जंतर मंचर में सोनम वांगचुक से मुलाकात की।
  • वांगचुक का 17वें दिन भूख विरोध में स्वास्थ्य गिरावट का जोखिम बढ़ा।
  • सभी सार्वजनिक हस्तियों ने NEET परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ सरकार को जवाबदेह करने की माँग की।

नई दिल्ली के जंतर मंचर में मंगलवार को भारतीय अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने इंजीनियर‑एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके से मुलाकात की। यह मुलाकात वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख विरोध के 17वें दिन हुई, जब उनके स्वास्थ्य में गिरावट के संकेत सामने आ रहे थे।

पृष्ठभूमि और कारण

वांगचुक ने 28 जून को जंतर मंचर में सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (NEET) में कथित अनुचित प्रथा के कारण त्यागने की मांग के साथ विरोध शुरू किया। उनका मुख्य दावा है कि परीक्षा में प्रश्नपत्रों की लीक, मूल्यांकन में पक्षपात और छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने वाली कई अनियमितताएँ हुईं। इस कारण से CJP ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया, जिसमें कई कलाकार, लेखक और शैक्षणिक विशेषज्ञ शामिल हुए।

स्वरा का समर्थन और सार्वजनिक प्रतिक्रिया

स्वरा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ में अभिजीत को धन्यवाद दिया और वांगचुक के लिए कहा, “अडिग सोनम वांगचुक सर हमारे बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। मेरी पूरी एकजुटता और कृतज्ञता।” इस संदेश ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हुए कई अन्य हस्तियों के समर्थन को प्रज्वलित किया। अरुंधती रॉय, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और फिल्म निर्माता संजय काक ने भी CJP को भूख विरोध समाप्त करने की अपील की, जबकि उन्होंने आंदोलन के वैध कारणों को भी मान्यता दी।

स्वास्थ्य जोखिम और आगे की दिशा

अभिजीत डिपके ने X (पूर्व Twitter) पर बताया कि वांगचुक मांसपेशी क्षय और तीव्र दर्द से जूझ रहे हैं, और उन्होंने सरकार से संवाद की मांग की। इस बीच, जनता और कई राजनेता इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और शैक्षणिक सुधार के प्रमुख एजेंडा के रूप में देख रहे हैं। यदि सरकार ने तुरंत संवाद नहीं किया, तो विरोध का विस्तार और अधिक तीव्र हो सकता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिरता दोनों पर असर पड़ेगा।

भविष्य की संभावनाएँ

जैसे-जैसे 20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी हो रही है, सभी संकेत बताते हैं कि यह आंदोलन केवल एक भूख विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा नीति में गहरी बदलाव की मांग है। यदि सरकार ने पारदर्शी जांच और सुधार लागू किए, तो यह भविष्य में समान समस्याओं को रोकने में मदद कर सकता है। अन्यथा, आंदोलन का विस्तार और अधिक कलाकारों एवं नागरिक समाज के समर्थन को आकर्षित कर सकता है, जो भारतीय लोकतंत्र की बहु-आवाजी प्रकृति को उजागर करेगा।