छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईबिक्स के चेयरमैन विकस गर्ग को भाजपा के संरक्षण का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया। एंटी‑मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (ED) ने गर्ग को 10 दिनों के लिए हिरासत में रखा और बड़ी धनराशि वाले महदेव बेटिंग ऐप केस की जांच जारी है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- भूपेश बघेल ने ईबिक्स चेयरमैन विकस गर्ग को बीजेपी के संरक्षण का आरोप लगाया
- ED ने विकस गर्ग को 10 दिन की हिरासत में रखा
- मैहदेव बेटिंग ऐप केस में 6,000 करोड़ रुपये की संभावित हानि
भूपेश बघेल, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री, ने बुधवार को सार्वजनिक मंच पर कहा कि ईबिक्स के चेयरमैन विकस गर्ग, जिन्हें एंटी‑मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (ED) ने पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया, भाजपा के संरक्षण में थे। बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें गर्ग को छह वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ दिखाया गया, और कहा कि उनका पिता एक पूर्व भाजपा विधायक थे।
पृष्ठभूमि और महदेव ऐप मामला
महदेव बेटिंग ऐप केस भारत के इतिहास में सबसे बड़े ऑनलाइन जुआ स्कैमों में से एक माना जाता है, जिसमें लगभग ₹6,000 करोड़ की अवैध आय का अनुमान है। इस मामले की जाँच के दौरान, कई विदेशी ऑपरेटरों और भारतीय मध्यस्थों के बीच धन के प्रवाह को उजागर किया गया। 2024 में, राज्य आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने बघेल को भी इस केस में आरोपी ठहराया, जिसके बाद इसे CBI को सौंप दिया गया।
एडी की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
ED ने गर्ग को दिल्ली में उनके आवास से गिरफ्तार किया और रायपुर के विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उन्हें 10 दिनों के लिए एजेंसी की हिरासत में रखने का आदेश दिया, जो 24 जुलाई तक जारी रहेगा। साथ ही, लगभग ₹940.77 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया, जिसमें आवासीय इमारतें, भूमि, शेयर और अन्य सिक्योरिटीज़ शामिल हैं।
भाजपा का खंडन और राजनीतिक असर
राज्य भाजपा प्रवक्ता विजयशंकर मिश्रा ने बघेल के आरोपों को तुरंत खारिज किया, कहा कि विकस गर्ग का भाजपा से कोई संबंध नहीं है और “कोई भी अपराधी कानून के सामने बराबर है”। यह बयान इस समय अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। बघेल के आरोपों को विपक्षी पार्टियों द्वारा एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिससे भाजपा को सार्वजनिक धारणा में नुकसान पहुँचाने की आशा है।
भविष्य की संभावनाएँ
जांच के विस्तार में विदेशी ओमान स्थित ऑपरेटरों को भारत में लाने के लिए एडी ने प्रत्यर्पण की मांग भी दर्ज की है। यदि अदालतें एडी की इस कार्रवाई को मंजूरी देती हैं, तो यह भारतीय जुआ नियमन की सख्त प्रवर्तन नीति का संकेत देगा। साथ ही, इस केस के परिणाम से छत्तीसगढ़ में डिजिटल वित्तीय प्लेटफ़ॉर्मों की नियामक निगरानी और सार्वजनिक विश्वास पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।