छत्तीसगढ़ में प्रधान मंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के कार्यान्वयन में बड़े पैमाने पर गवर्नेंस त्रुटियां, फंड का दुरुपयोग और पारदर्शिता की कमी पाई गई है। CAG के ऑडिट से स्पष्ट हुआ कि 13,101 करोड़ रुपये के कोष में से अधिकांश अनजाने क्षेत्रों में खर्च हो गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 13,101 करोड़ रुपये के कोष में से 78% अनजाने कार्यों में खर्च हुआ
- निर्धारित लाभार्थियों की पहचान में देरी और अयोग्य खर्च
- खुले निविदा प्रक्रिया की अनुपस्थिति और प्रमुख पदों में भर्ती की कमी
भारत के नियंत्रक और लेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में प्रधान मंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के कार्यान्वयन की व्यापक जांच की, जिससे फंड के प्रबंधन में गहरी खामियां उजागर हुईं। 2015 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य खनन‑प्रभावित क्षेत्रों के सामाजिक‑आर्थिक विकास को तेज़ करना था, परंतु 2015‑16 से 2023‑24 तक के डेटा में यह दिखा कि कोष के 13,101 करोड़ रुपये में से 10,253 करोड़ (लगभग 78%) को राज्य‑व्यापी विभिन्न परियोजनाओं में खर्च किया गया, जिनमें कई अनियोजित और गैर‑लाभकारी कार्य शामिल थे।
पृष्ठभूमि और नीति उद्देश्यों
PMKKKY के तहत प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) स्थापित किए गए, जो खनन और क्वारी लीज़धारकों से योगदान प्राप्त करते हैं। इन निधियों का लक्ष्य खनन‑प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और आजीविका के अवसर प्रदान करना था। हालांकि, CAG की रिपोर्ट ने दिखाया कि ‘प्रभावित लोग’ की परिभाषा को विस्तारित करके सभी स्थानीय जनसंख्या को शामिल कर दिया गया, जिससे फोकस धुंधला हो गया।
मुख्य त्रुटियां और उनके प्रभाव
ऑडिट में 30 मामलों की जांच में पता चला कि 709.47 करोड़ रुपये अनियमित रूप से वितरित किए गए, जबकि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान स्पष्ट नहीं थी। 1,734 सीधे प्रभावित गांवों में से 754 (लगभग 44%) को कोई सहायता नहीं मिली। इसके अलावा, फंड को स्वागत द्वार, बाग़, सरकारी कार्यालयों की सजावट, निजी शैक्षणिक संस्थानों को अनुदान आदि जैसे गैर‑योग्य कार्यों पर खर्च किया गया।
प्रशासनिक लापरवाही और पारदर्शिता की कमी
फंड के उपयोग में मास्टर प्लान, विज़न डॉक्यूमेंट या वार्षिक योजना की अनुपस्थिति स्पष्ट थी। कई मामलों में 41.80 करोड़ रुपये ऐसे अधूरे प्रोजेक्ट्स पर खर्च हुए, जैसे कि कला‑संस्कृति केंद्र, बायोगैस प्लांट और पॉल्ट्री एवं मशरूम उत्पादन केंद्र। खुले निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया; 17.49 करोड़ रुपये सीमित कोटेशन और 38.82 करोड़ रुपये बिना तकनीकी विनिर्देशों के खरीदे गए, जो 2002 के छत्तीसगढ़ स्टोर खरीद नियमों का उल्लंघन है।
भविष्य की सिफ़ारिशें
CAG ने कई सुधारात्मक कदम सुझाए हैं: प्रभावित व्यक्तियों और गांवों की सटीक सूची प्रकाशित करना, मास्टर व वार्षिक योजनाएं तैयार करना, सामाजिक ऑडिट करवाना, निगरानी को सुदृढ़ बनाना और राज्य‑स्तर के DMF सेल को अनावश्यक धन हस्तांतरण रोकना। इन कदमों से योजना के मूल उद्देश्य—खनन‑प्रभावित समुदायों की दीर्घकालिक समृद्धि—को पुनर्स्थापित किया जा सकता है।