दिल्ली में 300 से अधिक संपत्तियों के बिल्डिंग प्लानों को बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज (IFC) के मंजूरी मिलने का संदेह है। जल बोर्ड एवं नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका को उजागर करने के लिए एक व्यापक जांच शुरू की गई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • लगभग 300 संपत्तियों के बिल्डिंग प्लान बिना IFC भुगतान के मंजूर किए गए।
  • जाँच में दिल्ली जल बोर्ड और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (MCD) के अधिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डाला जाएगा।
  • भुगतान न करने वाले मालिकों को नोटिस, वसूली प्रक्रिया और सीलिंग कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज (IFC) के बिना बिल्डिंग प्लानों की स्वीकृति पर संभावित अनियमितताओं की जांच का आदेश दिया है। जल बोर्ड मंत्री पारवेश वर्मा ने बताया कि प्रारम्भिक डेटा में लगभग 300 संपत्तियों, जिनका कुल क्षेत्रफल 3,000 वर्ग मीटर से अधिक है, में IFC का भुगतान शून्य दर्ज किया गया था।

पृष्ठभूमि और वर्तमान परिप्रेक्ष्य

IFC नई निर्माण और पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए आवश्यक है; यह जल एवं सीवेज नेटवर्क को विस्तारित करने के लिए राजस्व प्रदान करता है। 2026 में दरों में 70% तक कटौती के बाद भी, कई मामलों में यह चार्ज न ले कर स्वीकृति दी गई, जिससे राज्य को संभावित रूप से हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

जांच के प्रमुख पहलू

जांच में तीन समय-सीमाओं – पिछले 10 वर्ष, 5 वर्ष और 1 वर्ष – में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (MCD) द्वारा जारी किए गए बिल्डिंग प्लानों की समीक्षा शामिल होगी। साथ ही, जल बोर्ड के उन इंजीनियरों की भूमिका को भी जांचा जाएगा, जिनके निकट सेवानिवृत्ति का समय है, क्योंकि उनके पास प्रक्रिया में छेड़छाड़ करने की संभावना का संकेत मिला है।

संभावित परिणाम और भविष्य की नीति

यदि यह प्रमाणित होता है कि बिल्डिंग प्लान बिना भुगतान के मंजूर किए गए हैं, तो प्रभावित संपत्ति मालिकों को नोटिस, वसूली प्रक्रिया और अनुत्तरदायी मामलों में सीलिंग कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यह कदम न केवल राजस्व की रक्षा करेगा, बल्कि भविष्य में पारदर्शी एवं न्यायसंगत निर्माण प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक चेतावनी भी बनेगा।

साथ ही, सरकार ने कहा है कि वह भविष्य में अधिक कड़ी निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली लागू करेगी, जिससे IFC भुगतान की स्थिति तुरंत सत्यापित की जा सके।