दिल्ली में विशेष तीव्र सुधार (SIR) प्रक्रिया के लिये निर्वाचन आयोग ने मौजूदा समय सीमा को 8 अगस्त तक बढ़ा दिया है। अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर को प्रकाशित होगी, जिससे चुनाव की तैयारी में अतिरिक्त समय मिलेगा।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • दिल्ली में SIR की अंतिम तिथि 8 अगस्त तक बढ़ी
  • ड्राफ्ट रोल 17 अगस्त को, अंतिम रोल 19 अक्टूबर को प्रकाशित होगा
  • डिजिटलीकरण में अभी 14.35% फॉर्म ही प्रोसेस हुए हैं

निर्वाचन आयोग (EC) ने 30 जून से शुरू हुई दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष तीव्र सुधार (SIR) कार्यक्रम में दरवाज़ा-दरवाज़ा सत्यापन को 8 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इस विस्तार का मुख्य कारण फॉर्मों का डिजिटल रूप में रूपांतरण अपेक्षित गति से धीमा चल रहा था, जिससे ब्लॉक स्तर के अधिकारी (BLO) पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था।

पुनर्निर्धारित समय-सारणी

पहले 29 जुलाई को समाप्त होने वाला यह महीना‑लंबा सत्यापन अब 8 अगस्त तक जारी रहेगा। ड्राफ्ट रोल 5 अगस्त के बजाय 17 अगस्त को जारी किया जाएगा, जबकि दावों और आपत्तियों की अवधि 17 अगस्त से 16 सितंबर तक विस्तारित होगी। इन आपत्तियों का निपटारा 15 अक्टूबर तक किया जाएगा, और अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर को सार्वजनिक होगी।

डिजिटलीकरण की चुनौतियाँ

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के आंकड़ों के अनुसार, ओल्ड दिल्ली, न्यू दिल्ली और नॉर्थ ईस्ट जिलों में फॉर्मों का वितरण पूर्ण हो चुका है, और लगभग 1.45 करोड़ मतदाता तक फॉर्म पहुंच चुका है। लेकिन केवल 14.35% (लगभग 20.8 लाख) फॉर्म ही डिजिटल रूप में प्रोसेस हुए हैं। यह प्रक्रिया BLO को ऐप के माध्यम से फॉर्म को मानचित्रित करने और स्कैन की हुई प्रति अपलोड करने की आवश्यकता रखती है, जिससे समय‑साध्य कार्य बढ़ रहा है।

भौतिक सत्यापन और आगामी कदम

अब तक 2.2 लाख ऑनलाइन एंट्री फॉर्म अभी भी भौतिक सत्यापन की प्रतीक्षा में हैं। आयोग ने कहा है कि शेष अवधि में प्राथमिकता फॉर्मों की संग्रहण और सत्यापन पर होगी, ताकि कोई योग्य मतदाता छूट न जाए। प्रत्येक मतदाता को अपना भराया फॉर्म वापस करना अनिवार्य होगा, चाहे वह मानचित्रित हो या नहीं, ताकि उनका नाम ड्राफ्ट रोल में सम्मिलित हो सके।

निहितार्थ और भविष्य की राह

समय सीमा का विस्तार मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिये महत्वपूर्ण कदम माना गया है। यह न केवल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को बढ़ाएगा, बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में संभावित विवादों को भी कम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटलकरण की गति को और तेज किया जाए, तो भविष्य में समान प्रक्रियाएँ अधिक सुगमता से पूरी हो सकेंगी।