बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गोव्डा ने कहा कि 50 साल पहले बनायीं गई मौजूदा क़ानूनों को बदलना आवश्यक है। नया अपार्टमेंट (स्वामित्व और प्रबंधन) बिल, जबकि पूर्ण नहीं, शहर की तेज़ी से बढ़ती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- नया अपार्टमेंट बिल 2026 क़ानूनी अंतराल को पाटने की कोशिश करता है।
- सरकार ने सार्वजनिक परामर्श के लिए बिल का मसौदा साझा किया है।
- भविष्य में कानून में सुधार के लिए निरंतर संशोधन की संभावना है।
बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गोव्डा ने बुधवार, 15 जुलाई, 2026 को कहा कि प्रस्तावित कर्नाटक अपार्टमेंट (स्वामित्व और प्रबंधन) बिल, 2026 अभी पूर्ण नहीं है, परन्तु यह शहर की बढ़ती आवासीय ज़रूरतों को समझते हुए एक ठोस शुरुआत है। मौजूदा क़ानून 50 साल से अधिक पुराना है, जबकि बेंगलुरु ने पिछले दशक में जनसंख्या, आर्थिक गतिविधि और इमारतों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान चुनौतियाँ
भारत में कई राज्यों के अपार्टमेंट क़ानून 1970 के दशक में लिखे गये थे, जब शहरी विकास का पैमाना आज के मुकाबले बहुत छोटा था। समय के साथ, बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में उच्च घनत्व, बहु-परिवारीय इमारतें और जटिल प्रबंधन संरचनाएँ उभरीं, जिससे पुराने क़ानून अपर्याप्त साबित हुए। गृहस्वामियों को स्वामित्व अधिकार, पंजीकरण प्रक्रिया और प्रबंधन में कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे विवाद और आर्थिक नुकसान हुआ।
सरकार की नई पहल और सार्वजनिक सहभागिता
सरकार ने आम तौर पर विधेयक के मसौदे को जनता से दूर रखा था, पर इस बार उन्होंने बिल को खुला कर दिया है ताकि हितधारक अपने विचार प्रस्तुत कर सकें। गोव्डा ने बताया कि एक विशेष ई‑मेल आईडी और ऑनलाइन मंच स्थापित किया गया है, जहाँ अपार्टमेंट मालिक, प्रबंधन कंपनियाँ और रियल एस्टेट विशेषज्ञ अपने सुझाव भेज सकते हैं। यह पारदर्शी प्रक्रिया न केवल विधायकों को वास्तविक समस्याओं से परिचित कराएगी, बल्कि भविष्य में विधेयक में आवश्यक संशोधन को भी सुगम बनाएगी।
मुख्य मंत्रियों का समर्थन और भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार ने भी इस पहल को सराहा, यह कहा कि सरकार का लक्ष्य पूर्ण स्वामित्व अधिकार सुनिश्चित करना है, जिससे खरीदारों को अनावश्यक बाधाओं से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह विधेयक न केवल मौजूदा विवादों को हल करेगा, बल्कि भविष्य के आवासीय विकास को भी स्थिरता प्रदान करेगा।
आगे की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल एक दिशा‑निर्देश के रूप में कार्य करेगा, परन्तु इसे प्रभावी बनाने के लिए निरंतर निगरानी और समय‑समय पर संशोधन आवश्यक होगा। यदि सभी हितधारकों की आवाज़ें सही रूप में शामिल की जाती हैं, तो यह क़ानून बेंगलुरु के तेज़ी से बढ़ते शहरी परिदृश्य में एक मॉडल बन सकता है, जो अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा स्रोत हो सकता है।