कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार ने बीडाडी टाउनशिप परियोजना के संबंध में कहा कि कोई भी किसान की ज़मीं ज़बरदस्ती नहीं ली जाएगी और विवाद को सुलझाने के लिए एक समिति गठित की जाएगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्र सरकार के बिडाडी टाउनशिप योजना पर ज़मीनी विवाद जारी
  • मुख्यमंत्री ने ज़बरदस्ती ज़मीं लेनै से इनकार किया
  • किसानों के अधिकार सुरक्षित रखने हेतु समिति गठित

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवाकुमार ने मंगलवार को बीडाडी टाउनशिप परियोजना को लेकर बढ़ते किसानों के विरोध को शांत करने हेतु स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसी भी किसान की ज़मीं को ज़बरदस्ती नहीं लेगी और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। यह घोषणा तब आई जब परियोजना के लिए एक भूमि सर्वेक्षण के दौरान किसान विरोधी झड़पें हुईं, जिससे कई लोगों को चोटें भी आईं।

परियोजना की पृष्ठभूमि और विवाद

बीडाडी टाउनशिप, लगभग 18,000 करोड़ रुपये की लागत वाली, बेंगलुरु के निकट पाँच एकीकृत टाउनशिपों की योजना का हिस्सा है। सरकार का दावा है कि यह शहरी विस्तार को नियंत्रित करने, बेंगलुरु के बढ़ते आवासीय दबाव को कम करने और दीर्घकालिक बुनियादी ढाँचा तैयार करने में मदद करेगा। वहीं विपक्षी दल, विशेषकर भाजपा और जेडी(एस), इस परियोजना को किसानों की उपजाऊ ज़मियों को खतरे में डालने वाला मानते हैं।

मुख्यमंत्री का आश्वासन और समिति का गठन

शिवाकुमार ने कहा, “जो किसान अपनी ज़मीं नहीं देना चाहते, वे खेती जारी रख सकते हैं। जो स्वेच्छा से देना चाहते हैं, उन्हें उचित मुआवजा मिलेगा, लेकिन एक भी गंटा ज़मीं ज़बरदस्ती नहीं ली जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि एक समिति बनाकर किसानों की शिकायतें सुनी जाएँगी और कानूनी पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह उनका “ड्रीम प्रोजेक्ट” नहीं है; यह पिछले सरकारों द्वारा शुरू किया गया एक पहल है। उन्होंने 2006 में तब के मुख्यमंत्री एच.डी. कुमरास्वामी के अधीन बीडाडी टाउनशिप के प्रारम्भिक अनुमोदन का हवाला देते हुए कहा कि इस परियोजना को बीएस येडियुरप्पा सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत आगे बढ़ाया था। शिवाकुमार ने विपक्षी दलों पर किसानों को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया।

भविष्य की दिशा

भारी विरोध के बीच भाजपा ने 17 जुलाई को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एक दिन के बैठकों का आह्वान किया है, जिसमें किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की मांग की गई है। इस बीच, कर्नाटक सरकार को इस परियोजना को लेकर सामाजिक संतुलन बनाते हुए आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।