मदुरै के तस्मैक कर्मचारियों ने राज्य सरकार के विरोध में हंगर स्ट्राइक शुरू किया। उन्होंने 23 साल से अस्थायी तौर पर काम करने वाले अपने कर्मचारियों को नियमितीकरण, समय-सीमा वेतन और समान लाभ पाने की माँग की। यह आंदोलन राज्य‑स्तर की श्रम नीतियों में बदलाव का संकेत देता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- तस्मैक कर्मचारियों ने नियमितीकरण और समय‑सीमा वेतन की मांग की
- हंगर स्ट्राइक के माध्यम से सरकार को तुरंत कार्यवाही करने का आग्रह
- अन्य सरकारी रिटेल संगठनों के समान लाभों की समानता पर ज़ोर
मदुरै के तस्मैक (तमिलनाडु राज्य शराब निगम) कर्मचारियों ने 15 जुलाई को हंगर स्ट्राइक का आह्वान किया, जिससे राज्य सरकार पर उनके व्यापक हक़ों को मान्यता देने का दबाव बना। यह आंदोलन सीआईटीयू (सेंटर फॉर इंडस्ट्रियल ट्रेड यूनियन) से जुड़ी यूनियन द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें कई जिलों के ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि भी शामिल थे।
मांगों का विस्तृत विवरण
कर्मचारियों ने चार प्रमुख बिंदुओं पर सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की: (i) अस्थायी अनुबंध वाले कर्मचारियों को नियमित कर देना, (ii) समय‑सीमा वेतन के साथ बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस प्रदान करना, (iii) अन्य सरकारी रिटेल संस्थानों जैसे अमुधम् स्टोर्स, आविन, को‑ऑप्टेक्स आदि के समान लाभों का विस्तार, तथा (iv) कर्मचारियों को खाली शराब की बोतलों की संग्रहण कार्य से मुक्त करना।
पिछले वादे और वर्तमान निराशा
तमिलनाडु सरकार ने पिछले चुनाव में वादा किया था कि 23 साल से अस्थायी रूप से काम कर रहे तस्मैक कर्मचारियों को तुरंत नियमित किया जाएगा। परंतु इस वादे को अब तक लागू नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में निराशा और असंतोष बढ़ा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में तस्मैक कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष नहीं है, जबकि समान सरकारी संस्थानों में यह मानक लागू है।
सिस्टमिक बदलाव की मांग
कर्मचारियों ने यह भी अनुरोध किया कि तस्मैक आउटलेट्स में अलग-अलग नकद एवं बिक्री काउंटर स्थापित किए जाएँ, जिससे कार्यकुशलता बढ़ेगी और ग्राहक सेवा में सुधार होगा। इसके अलावा, उन्होंने इम्प्लॉयीज़ स्टेट इंश्योरेंस (ESI) योजना के तहत अपने और अपने परिवार के लिए चिकित्सा कवरेज सुनिश्चित करने की मांग की।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि सरकार इन मांगों पर शीघ्रता से विचार नहीं करती, तो हंगर स्ट्राइक का विस्तार और व्यापक सामूहिक कार्यवाही की संभावना बढ़ सकती है। इस प्रकार का संघर्ष न केवल तस्मैक की कार्यक्षमता को प्रभावित करेगा, बल्कि तमिलनाडु में श्रमिक अधिकारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है।