तिरु्पपुर के वकील द्वारा दायर जनहित याचिका में टीवीके विधायक एन. एलायराजा के 35 करोड़ रुपये के रिश्वत के मामले में सीबीआई जांच की मांग की गई है। अदालत ने इस याचिका को प्रधान न्यायाधीश सुश्रुत अर्विंद धर्माधीकर और न्यायाधीश जी. अरुल मुर्गन के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- टिवीके विधायक के 35 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में सीबीआई जांच का आग्रह।
- फिरौती के तहत पुलिस स्टेशन की जुरिस्डिक्शन को राजनीतिक कारणों से टाला गया।
- जनहित याचिका में अन्य एआईएडीएमके और डीएमके विधायकों के समान आरोपों को भी शामिल किया गया।
मद्रास हाई कोर्ट ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (पीआईएल) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। यह याचिका तिरु्पुर स्थित वकील जे. बालासुब्रमणि द्वारा दायर की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य टिवीके विधायक एन. एलायराजा के खिलाफ 35 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों की पूरी तरह से जांच कराना है।
याचिका का मुख्य दावा
याचिकाकर्ता का कहना है कि त्रिप्लिकेन पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR को राजनीतिक कारणों से बनवाया गया है। वह इस बात पर बल देता है कि शिकायत के बाद FIR को उथंगराई (क्रिष्णागिरी) के बजाय त्रिप्लिकेन पुलिस स्टेशन पर दर्ज किया गया, जहाँ विधायक का हॉस्टल स्थित है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात की आशंका उत्पन्न होती है।
पार्श्वभूमि और व्यापक संदर्भ
यह मामला केवल एक विधायक तक सीमित नहीं है। याचिकाकर्ता ने एआईएडीएमके टिकट पर चुने गए कई विधायकों के इस्तीफे और डीक्यूम के अन्य विधायकों द्वारा भी समान धनराशि के प्रस्तावों की शिकायतें दर्ज की हैं। इन सभी घटनाओं को मिलाकर वह केंद्र सरकार के एजेंसी, अर्थात् सीबीआई, को हस्तक्षेप करने की मांग करता है, ताकि एक स्वतंत्र और व्यापक जांच की जा सके।
कानूनी और राजनीतिक प्रभाव
यदि अदालत इस याचिका को स्वीकृति देती है और सीबीआई को मामला सौंपती है, तो यह तमिलनाडु राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण precedent स्थापित करेगा। साथ ही, यह राजनीतिक दलों के भीतर 'हॉर्स ट्रेडिंग' यानी सत्ता बनाए रखने के लिये अनुचित आर्थिक लेनदेन की जांच को भी उजागर करेगा। यह कदम राज्य स्तर पर न्यायिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
आगे की राह
जजेस द्वारा सुनवाई के बाद अगले कदमों का इंतजार रहेगा। यदि सीबीआई को केस सौंपा जाता है, तो संभावित जांच के दायरे में टीवीके विधायक के अलावा अन्य कई राजनेता भी शामिल हो सकते हैं। इस प्रकार, तमिलनाडु की राजनीति में एक नई पारदर्शिता की लहर आ सकती है, जो जनता के विश्वास को पुनर्स्थापित करने में मददगार हो सकती है।