सोनम वांगचुक ने कोक्रोच जनता पार्टी (CJP) के युवा‑नेतृत्व वाले विरोध में भाग लिया, यह कदम उनकी पत्नी गीता अँगमो के अनुसार पूरी तरह से स्वाभाविक था। उन्होंने बताया कि वांगचुक इस आंदोलन को ‘नकली’ तत्वों से बचाना और शिक्षा‑संबंधी मुद्दों को सच्ची दिशा देना चाहते हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सोनम वांगचुक ने CJP के विरोध में स्वाभाविक रूप से शामिल हुए
  • उनकी पत्नी गीता अँगमो ने बताया कि यह कदम युवा आंदोलन को बचाने के लिए है
  • वांगचुक की भूख हड़ताल ने उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला

सोनम वांगचुक, जो लद्दाख की शिक्षा‑सुधार के प्रतीक और 2018 के रामोन मैगसेसेय अवार्ड विजेता हैं, ने कोक्रोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित जंतर मंच पर चल रहे विरोध में भाग लिया। यह आंदोलन, जो NEET परीक्षा की अनुचित प्रक्रियाओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पदत्याग की मांग पर केंद्रित है, अब 26वें दिन पर पहुंच चुका है।

पर्यावरणीय और सामाजिक पृष्ठभूमि

वांगचुक पहले लद्दाख में नागरिक समाज के साथ मिलकर राज्य को संविधान के छठे अनुसूची में tribal status देने की मांग में सक्रिय रहे। 2025 में लेह में हुई हिंसा के बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत 170 दिन तक जेल में रखा गया था, लेकिन मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया। अब वह शिक्षा सुधार के साथ-साथ युवा वर्ग के असंतोष को भी समझते हुए CJP के मंच पर आए हैं।

पत्नी गीता अँगमो का विवरण

वांगचुक की पत्नी, गीता ज. अँगमो, ने कहा कि उनका पति इस आंदोलन को ‘ऑर्गेनिक’ मानते हैं, क्योंकि CJP एक युवा‑नेतृत्व वाला समूह है और उन्हें ‘दुष्ट’ तत्वों द्वारा इसे बिगाड़े जाने का ख़तरा महसूस होता है। उन्होंने यह भी बताया कि वांगचुक का उद्देश्य सभी सजग नागरिकों को इस आंदोलन में शामिल करना है, ताकि शिक्षा मंत्री के पदत्याग को पहला कदम माना जा सके।

भूख हड़ताल और स्वास्थ्य स्थिति

वांगचुक ने 17 दिन से भूख हड़ताल जारी रखी है, जिसे उन्होंने लद्दाख के ठंडे मौसम की तुलना में दिल्ली की उष्ण और आर्द्र परिस्थितियों में 34‑दिन की हड़ताल कहा। उनके वजन में 8.9 किलोग्राम की गिरावट आई है, वर्तमान वजन 57.15 किलोग्राम है। चिकित्सा रिपोर्ट के अनुसार उनका रक्तचाप 105/76 mmHg, रक्त शर्करा 80 mg/dL और ऑक्सीजन संतृप्ति 97 % है, लेकिन उन्हें 24‑घंटे की मेडिकल निगरानी में रखा गया है।

भविष्य की संभावनाएँ

यदि वांगचुक की भूमिका इस आंदोलन में जारी रहती है, तो यह युवा वर्ग की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बना सकता है। साथ ही, यह सरकार को शिक्षा नीति में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में कदम बढ़ाने का दबाव भी बढ़ा सकता है।