सुरत‑तापी जिलों में सुमुल डेयरी के नौ बोर्ड सीटों के चुनाव हुए। बीजेडपी ने सात सीटों में बिना प्रतिस्पर्धा के जीत हासिल की, जबकि अधिकांश सीटों में 100% मतदान दर्ज हुआ।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बीजेडपी ने सात सीटों में बिना प्रतिद्वंद्वी के जीत हासिल की
  • सात में सात सीटों में 100% मतदान दर्ज हुआ
  • परिणाम 17 जुलाई को घोषित किए जाएंगे

सुरत और टापी जिलों में स्थित सुमुल डेयरी बोर्ड के नौ सीटों के चुनाव 16 जुलाई को शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किए गए। कुल 21 उम्मीदवारों ने इस चुनाव में भाग लिया, जबकि बोर्ड के कुल 16 सीटों में से केवल नौ के लिए प्रत्यक्ष मतदान हुआ।

पृष्ठभूमि और महत्व

सुमुल डेयरी, जिसकी वार्षिक टर्नओवर लगभग ₹6,500 करोड़ है, 19 निदेशकों (जिनमें तीन नामित सदस्य) के साथ कार्य करता है और 2.5 लाख से अधिक किसानों को दूध के संग्रह एवं विपणन में जोड़ता है। इस संस्था के बोर्ड का चयन अक्सर राज्य‑स्तरीय राजनीति का प्रतिबिंब माना जाता है, क्योंकि दूध समितियों के प्रमुख ही मतदाता होते हैं।

परिणामों का विवरण

बीजेडपी‑समर्थित समूह ने सात सीटों में बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के जीत हासिल की। ओलपाड़ (Olpad) और उमरपाड़ (Umarpada) को छोड़कर बाकी सभी नौ सीटों में 100% मतदान दर्ज हुआ। विशेष रूप से, मंडवी (129 वोट), महुवा (65 वोट), नज़र (51 वोट), कुकर्मुंदा (43 वोट), व्यारा (90 वोट), सोंगध (175 वोट) और डोलवन (52 वोट) में पूर्ण मतदान हुआ। ओलपाड़ में 42 में से 39 और उमरपाड़ में 60 में से 59 मतदानकर्ता ने भाग लिया।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

बीजेडपी की ‘सहकार पैनल’ और पशु पालक हित रक्षा समिति (जो बीजेडपी के पुनरागमन करने वाले नेताओं और कांग्रेस के प्रतिनिधियों को मिलाकर बनी है) के बीच पहली बार सीधा मुकाबला हुआ। इस चुनाव को देखते हुए, बीजेडपी ने अपनी ग्रामीण आधारशिला को सुदृढ़ करने का इरादा जाहिर किया, जबकि कांग्रेस ने पाँच मजबूत उम्मीदवारों को प्रमुख मानते हुए आशावाद दिखाया।

आगे की राह

परिणामों की आधिकारिक घोषणा 17 जुलाई को सुमुल डेयरी के बैंकेट हॉल में, प्रांत अधिकारी नेहा सावनी की उपस्थिति में होगी। विजयी पक्ष को नई नीतियों, मूल्य तय करने की रणनीति और संभावित राज्य‑व्यापी विस्तार की योजना बनानी होगी, जिससे किसानों के हित में स्थिरता बनी रहे।