बिहार सरकार ने ग्राम पंचायतों को कर लगाने और वसूलने का अधिकार देने वाले नए नियमों को मंजूरी दे दी है, जिससे उनकी वित्तीय निर्भरता कम होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बुनियादी ढांचे, पर्यटन और स्थानीय सीमांकन से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बिहार कैबिनेट ने 'ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली, 2026' के मसौदे को मंजूरी दी।
  • अब ग्राम पंचायतें होल्डिंग टैक्स, व्यावसायिक शुल्क और विज्ञापन बोर्डों पर टैक्स वसूल सकेंगी।
  • 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होगा।
  • अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) के तहत जलापूर्ति और सीवरेज नेटवर्क के लिए 829 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी।
  • धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'बिहार स्टेट रोपवेज कंपनी लिमिटेड' का गठन किया जाएगा।

बिहार में स्थानीय स्वशासन और ग्रामीण विकास को एक नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 30 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें सबसे प्रमुख निर्णय ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने का है। नए नियमों के तहत अब राज्य की ग्राम पंचायतों को अपने स्तर पर कर (टैक्स) लगाने और उसे वसूलने का कानूनी अधिकार मिल गया है। इस कदम से पंचायतों की राज्य सरकार पर वित्तीय निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।

वित्तीय स्वायत्तता की दिशा में बड़ा कदम

कैबिनेट सचिवालय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) अरविंद कुमार चौधरी ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि कैबिनेट ने 'बिहार ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली, 2026' के मसौदे को अपनी मंजूरी दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के बावजूद अब तक इसके लिए विस्तृत नियम नहीं बनाए गए थे। इस वजह से पंचायतों द्वारा वसूले जाने वाले करों की अधिकतम सीमा और उनकी वसूली की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं थी। नई नियमावली के लागू होने से अब पंचायतें होल्डिंग टैक्स, व्यापार, विज्ञापनों, होर्डिंग्स और स्थानीय उद्योगों पर शुल्क लगा सकेंगी। इसके अलावा, पंचायतों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए यूजर चार्ज भी वसूला जा सकेगा।

पंचायतों का परिसीमन और प्रशासनिक सुधार

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में, कैबिनेट ने पंचायती राज विभाग के उस प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है जिसके तहत वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से गठन और परिसीमन किया जाएगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना, विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना और जनसंख्या के अनुपात में संतुलित प्रतिनिधित्व प्रदान करना है। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित विकास को भी गति मिलेगी।

बुनियादी ढांचे और पर्यटन को रफ्तार

कैबिनेट ने शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र प्रायोजित अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) योजना के तहत हाजीपुर में 232.90 करोड़ रुपये की सीवरेज नेटवर्क और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी दी है। इसके साथ ही खगड़िया, सीतामढ़ी और समस्तीपुर के लिए कुल 596.43 करोड़ रुपये की तीन बड़ी जलापूर्ति परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई गई है। इसके अतिरिक्त, राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और सुरक्षित परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 'बिहार स्टेट रोपवेज कंपनी लिमिटेड' के गठन को मंजूरी दी गई है, जो राज्य के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर रोप-वे का निर्माण करेगी।

सामाजिक कल्याण और अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

कैबिनेट ने थारू जनजाति सहित अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एकीकृत थारूहाट विकास एजेंसी, पश्चिम चंपारण की योजनाओं की अवधि को वर्ष 2025-26 से बढ़ाकर 2030-31 करने की मंजूरी दी है। साथ ही, बिहार की जेलों में अनुबंध के आधार पर कार्यरत पूर्व सैनिकों (वार्डर) का मासिक मानदेय 19,800 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, अवैध खनन को रोकने और सरकारी राजस्व बढ़ाने के लिए 'बिहार खनिज (अवैध खनन, परिवहन और भंडारण निवारण) नियमावली, 2026' में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है।