एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने उमर खलीद को हर हफ्ते दो बार वीडियो मुलाकात करने की अनुमति दी, जबकि जेल प्रबंधन ने इसे एक तक घटाने का दावा किया था। यह फैसला जेल नियमों और मानवीय अधिकारों के बीच संतुलन दर्शाता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- उमर खलीद को दो साप्ताहिक वीडियो मुलाकातें पुनः प्रदान की गईं।
- कोर्ट ने जेल नियमों की मान्यताओं और मानवीय पहलुओं को संतुलित किया।
- यह निर्णय 2020 के दिल्ली दंगों के व्यापक साजिश मामले में चल रहे मुकदमे पर प्रभाव डाल सकता है।
कुर्कर्डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बजपे ने 13 जुलाई को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जिसमें सक्रियवादी उमर खलीद को प्रत्येक हफ़्ते दो बार वीडियो मुलाकात (ई‑मुलाकात) करने की अनुमति दी गई। यह आदेश तब आया, जब खलीद की वकालत ने बताया कि मई 2026 से उनकी मुलाकातें एक तक घटा दी गई थीं, बिना किसी स्पष्ट कारण के।
पृष्ठभूमि और कानूनी संदर्भ
उमर खलीद 2020 के उत्तर‑पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में यूएपीए (UAPA) और भारतीय दंड संहिता के तहत अभियुक्त हैं। वह लगभग छह साल से जेल में हैं और इस दौरान दो साप्ताहिक ई‑मुलाकातें लगातार चल रही थीं, जिससे उन्हें परिवारिक संपर्क बनाए रखने में मदद मिली।
जेल प्रबंधन और पुलिस की आपत्तियां
जेल अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली जेल नियम केवल एक बार साप्ताहिक ई‑मुलाकात की अनुमति देते हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा जोखिमों को लेकर आपत्ति जताई। दोनों पक्षों ने यह तर्क दिया कि अधिक संपर्क संभावित सुरक्षा खतरों को बढ़ा सकता है।
कोर्ट का तर्क और मानवीय पहलू
न्यायालय ने यह कहा कि निगरानी वाले वीडियो सत्र सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त रूप से कम कर देते हैं, साथ ही मानवीय दृष्टिकोण को भी ध्यान में रखा गया है। खलीद ने जेल नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया, इसलिए उसे दो साप्ताहिक मुलाकातें जारी रखने का अधिकार मिला।
भविष्य की संभावनाएं
यह फैसला न केवल उमर खलीद के व्यक्तिगत अधिकारों को मजबूत करता है, बल्कि अन्य कैदियों के लिए भी एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिन्हें समान परिस्थितियों में संपर्क की कमी का सामना करना पड़ता है। साथ ही, यह निर्णय 2020 के दंगों के बड़े साजिश मामले के सार्वजनिक विमर्श में नई दिशा दे सकता है।