ओमर अब्दुल्ला के चाचा, पूर्व राष्ट्रीय सम्मेलन नेता डॉ. मस्तफा कमाल की मृत्यु के बाद भी जम्मू‑कश्मीर एनसी ने 20 जुलाई जंतर मान्तर में अपने प्रदर्शन को जारी रखने का फैसला किया है। दिल्ली पुलिस की अनुमति न मिलने पर संभावित अगले कदमों की चर्चा की जाएगी।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- जम्मू‑कश्मीर एनसी 20 जुलाई जंतर मान्तर में प्रदर्शन करेगा।
- डॉ. मस्तफा कमाल की निधन के बावजूद योजना में कोई बदलाव नहीं।
- अन्य क्षेत्रीय दल अभी तक समर्थन नहीं दे पाए हैं।
जम्मू‑कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उनके चाचा, पूर्व राष्ट्रीय सम्मेलन नेता डॉ. मस्तफा कमाल की 14 जुलाई को मृत्यु के बाद भी 20 जुलाई को जंतर मान्तर में आयोजित प्रदर्शन में कोई बदलाव नहीं होगा। यह प्रदर्शन राज्यhood और संवैधानिक गारंटी की बहाली की माँग पर केन्द्रित है, जो 1953 में केन्द्र द्वारा छीन ली गई थी।
इतिहास और पृष्ठभूमि
1953 में जम्मू‑कश्मीर की विशेष संवैधानिक स्थिति को निरस्त कर दिया गया, जिससे राज्यhood का अधिकार छीन लिया गया। तब से विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाते हुए कई बार आंदोलन किए हैं। राष्ट्रीय सम्मेलन, जो 1939 में स्थापित हुआ, ने हमेशा इस मुद्दे को अपनी मुख्य एजेंडा में रखा है। डॉ. मस्तफा कमाल, जो 1950 के दशक से इस संघर्ष में प्रमुख आवाज़ रहे हैं, ने हमेशा जम्मू‑कश्मीर की पूर्व स्थितियों की वकालत की है।
वर्तमान स्थिति
एनसी ने नई दिल्ली के जंतर मान्तर में सभी विधायकों के साथ प्रदर्शन करने की योजना बनाई है, जो संसद के मानसून सत्र की पहली तारीख से मेल खाता है। इस आंदोलन में सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों को आमंत्रित किया गया है, पर अब तक किसी भी पार्टी ने औपचारिक समर्थन नहीं दिया है। अल्ताफ बुखारी, अपनी पार्टी के प्रमुख, ने बताया कि राज्यhood की मांग को केन्द्र के साथ संवाद के माध्यम से ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए, न कि टकराव के जरिए। उन्होंने रोजगार के अवसरों की कमी को भी प्रमुख मुद्दा बताया।
अन्य दलों की प्रतिक्रिया
जम्मू‑कश्मीर अपनी पार्टी के प्रमुख इंजीनियर रशिद अभी तिहर जेल में हैं, और उन्होंने अपने दल के प्रदर्शन में भागीदारी का निर्णय जेल में ही लेने को कहा है। वहीं, पीडिपी ने अभी तक तय नहीं किया है कि वह इस प्रदर्शन में भाग लेगा या नहीं। यह दिखाता है कि राज्यhood की मांग के बावजूद, क्षेत्रीय राजनीति में विभाजन और रणनीतिक असहमति बनी हुई है।
संभावित परिणाम
यदि दिल्ली पुलिस ने जंतर मान्तर में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी, तो एनसी ने अगले कदमों पर विचार किया है, जिसमें संसद में बहस या राष्ट्रीय स्तर पर वैधता के लिए न्यायिक कार्रवाई शामिल हो सकती है। इस प्रकार का प्रदर्शन न केवल जम्मू‑कश्मीर की स्थानीय राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि भारत के संघीय ढांचे में भी चर्चा को नई दिशा देगा।