मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मंत्रियों के पदों के लिए दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ चर्चा करने पहुंचे हैं। कैबिनेट में 20 रिक्त पदों को भरने के लिए जातिगत समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन पर गहन मंथन होगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, सिद्धारमैया और बी.के. हरिप्रसाद मंत्रियों के विस्तार पर चर्चा के लिए दिल्ली रवाना हुए।
- कर्नाटक कैबिनेट में वर्तमान में 20 मंत्री पद खाली हैं।
- चर्चा में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे शीर्ष नेता शामिल होंगे।
- विस्तार में जातिगत समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नए चेहरों को शामिल करने पर जोर दिया जाएगा।
बेंगलुरु/नई दिल्ली: कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज हो गई है क्योंकि राज्य में लंबे समय से प्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए कांग्रेस के दिग्गज नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, उनके पूर्ववर्ती और दिग्गज नेता सिद्धारमैया, तथा कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के लिए प्रस्थान किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य मंत्रियों के रिक्त पदों को भरने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व (हाईकमान) के साथ परामर्श करना है।
शक्ति संतुलन और जातिगत समीकरणों की चुनौती
वर्तमान में कर्नाटक कैबिनेट में 20 रिक्त स्थान हैं, जो राज्य सरकार के कामकाज और विधायी कार्यों के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह दल विभाजन और गुटबाजी को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। दिल्ली में होने वाली इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ गहन चर्चा होने की संभावना है।
कैबिनेट विस्तार केवल पदों का वितरण नहीं है, बल्कि यह 2028 के विधानसभा चुनावों की रणनीति का एक हिस्सा भी है। मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। चर्चा के केंद्र में मुस्लिम समुदाय से प्रतिनिधित्व, दलित और पिछड़ा वर्ग के समीकरणों के साथ-साथ महिलाओं की भागीदारी भी है। माना जा रहा है कि पार्टी नए चेहरों को मौका देकर आगामी चुनावों के लिए अपनी जमीन मजबूत करना चाहती है।
संभावित चेहरे और आगामी चुनौतियां
विभिन्न राजनीतिक गलियारों में कई नामों की चर्चा है। महिला विधायकों में लक्ष्मी हेब्बालकर और नयना मोटम्मा के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। वहीं, मुस्लिम समुदाय से सलीम अहमद और रिजवान अशरफ के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। अन्य महत्वपूर्ण नामों में लक्ष्मण सावदी, अजय सिंह और शरत बचे गौड़ा जैसे विधायक शामिल हैं।
यदि यह विस्तार अगस्त के मानसून सत्र से पहले संपन्न हो जाता है, तो नए मंत्रियों को अपने विभागों को समझने और विधायी कार्यों के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कांग्रेस अपने विधायकों की महत्वाकांक्षाओं और पार्टी की एकता के बीच कैसे तालमेल बिठाती है।