कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय के नाम पर विधायकों को निशाना बनाकर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। जालसाजों ने कैबिनेट मंत्री पद का लालच देकर करोड़ों की मांग की है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- जालसाजों ने खुद को प्रियंका गांधी के कार्यालय का स्टाफ बताया।
- कांग्रेस विधायकों से कैबिनेट मंत्री पद दिलाने के नाम पर 3 करोड़ रुपये की मांग की गई।
- केरल के अलाथुर से विधायक विद्या बालकृष्णन ने इस धोखाधड़ी को तुरंत पहचान लिया।
- कोझिकोड साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दक्षिण भारत के केरल राज्य से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ कांग्रेस सांसद और दिग्गज नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम का दुरुपयोग कर विधायकों को ठगने की कोशिश की गई। जालसाजों ने खुद को प्रियंका गांधी के कार्यालय का कर्मचारी बताकर कांग्रेस के कई विधायकों और सांसदों को निशाना बनाया और उन्हें राज्य कैबिनेट में मंत्री पद दिलाने के बदले भारी रकम की मांग की।
कैसे हुआ यह बड़ा फ्रॉड?
मिली जानकारी के अनुसार, अलाथुर से कांग्रेस विधायक विद्या बालकृष्णन को दिल्ली के एक नंबर से व्हाट्सएप कॉल प्राप्त हुआ। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अत्यंत आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि वह वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी के कार्यालय से बोल रहा है। जालसाज ने विधायक को प्रलोभन दिया कि वह उन्हें राज्य सरकार के मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण स्थान दिला सकता है, लेकिन इसके बदले उसे 3 करोड़ रुपये की तत्काल राशि देनी होगी।
नेताओं ने दिखाई सतर्कता, पुलिस जांच में जुटी
विधायक विद्या बालकृष्णन ने इस कॉल की संदिग्ध प्रकृति को तुरंत भांप लिया और किसी भी प्रकार का लेनदेन करने के बजाय तुरंत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सूचित किया। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रियंका गांधी के निजी सचिव राजकुमार ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। कोझिकोड साइबर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है और अब वे डिजिटल फुटप्रिंट्स के माध्यम से कॉलर की पहचान करने में जुटे हैं।
कई सांसदों को भी आए फर्जी कॉल
यह मामला केवल एक विधायक तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, केरल के दो अन्य प्रमुख सांसदों, शफी परम्बिल और डीन कुरियाकोस को भी इसी तरह के फर्जी कॉल प्राप्त हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह एक सुनियोजित साइबर अपराध का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक हस्तियों और उनके करीबियों को निशाना बनाना है। पुलिस अब उस दिल्ली के नंबर और कॉलर की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ले रही है।