ओडिशा पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से महत्वपूर्ण न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्टों के गायब होने के मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी राजेश वर्मा और पूर्व आईटी सचिव मनोज मिश्रा को तलब किया है। लापता दस्तावेजों में 2008 के कंधमाल दंगों और 2016 के अस्पताल अग्निकांड जैसी संवेदनशील जांच रिपोर्टें शामिल हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • भुवनेश्वर पुलिस ने पूर्व शीर्ष नौकरशाहों राजेश वर्मा और मनोज मिश्रा को समन जारी किया।
  • जांच ओडिशा सीएमओ से गायब हुई दो संवेदनशील न्यायिक जांच रिपोर्टों पर केंद्रित है।
  • लापता रिपोर्टों में 2008 के कंधमाल दंगे और 2016 के अस्पताल अग्निकांड की जांच शामिल है।

ओडिशा के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचाते हुए राज्य पुलिस ने दो पूर्व उच्च पदस्थ अधिकारियों, पूर्व आईएएस अधिकारी राजेश वर्मा और पूर्व आईटी सचिव मनोज मिश्रा को समन जारी किया है। भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन ने दोनों अधिकारियों को 22 जुलाई को सुबह 11 बजे जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई पिछली बीजू जनता दल (बीजेडी) सरकार के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से महत्वपूर्ण जांच आयोग की रिपोर्टों के रहस्यमय ढंग से गायब होने की चल रही जांच का हिस्सा है।

संवेदनशील मामलों की जांच रिपोर्ट गायब

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ओडिशा गृह विभाग ने 10 जून को एक औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि दो महत्वपूर्ण न्यायिक जांच रिपोर्टें गायब हैं। ये कोई सामान्य प्रशासनिक फाइलें नहीं हैं; ये राज्य की दो सबसे संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं की गहन जांच का प्रतिनिधित्व करती हैं। पहली रिपोर्ट जस्टिस एएस नायडू आयोग की है, जिसने वीएचपी नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद भड़के 2008 के कंधमाल सांप्रदायिक दंगों की जांच की थी। दूसरी रिपोर्ट भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में 2016 में लगी भीषण आग की राजस्व विभागीय आयुक्त की जांच से संबंधित है, जिसमें 20 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी

समन किए गए अधिकारियों ने पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण पदों को संभाला था। राजेश वर्मा ने 2017 और 2019 के बीच मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया था, जिस अवधि के दौरान ये रिकॉर्ड सीएमओ की कस्टडी में थे। वहीं, पूर्व भारतीय रेलवे यातायात सेवा (आईआरटीएस) अधिकारी मनोज मिश्रा को 2022 में अनुबंध के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी विभाग के प्रधान सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। मिश्रा को राज्य के डिजिटल डेटाबेस और आईटी ऑपरेशंस की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया था, जिससे यह पता लगाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है कि क्या कोई इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड या फिजिकल लॉग जानबूझकर मिटाए गए थे।

सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक निहितार्थ

यह जांच सत्ता परिवर्तन के साथ आने वाले राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव को भी रेखांकित करती है। जून 2024 में सरकार बदलने के बाद, कई जांच रिपोर्टों को गृह विभाग को हस्तांतरित किया जाना था। हालांकि अधिकांश फाइलें सौंप दी गईं, लेकिन ये दो बेहद संवेदनशील रिपोर्टें गायब पाई गईं। नई सरकार द्वारा इस मामले की आक्रामक जांच यह संकेत देती है कि वह प्रशासनिक खामियों और संभावित लीपापोती के लिए पिछली व्यवस्था को जवाबदेह ठहराने के लिए प्रतिबद्ध है।