पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई के शहीद दिवस पर तृणमूल कांग्रेस के दो गुट और कांग्रेस पार्टी अपनी राजनीतिक विरासत और शक्ति प्रदर्शन के लिए आमने-सामने हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 21 जुलाई का शहीद दिवस 1993 की पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की याद में मनाया जाता है।
  • तृणमूल कांग्रेस वर्तमान में आंतरिक विद्रोह का सामना कर रही है, जिसमें रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक बड़ा गुट अलग हो गया है।
  • इस वर्ष कोलकाता में तीन अलग-अलग रैलियां आयोजित की जाएंगी: ममता बनर्जी का गुट, रिताब्रता बनर्जी का गुट और कांग्रेस पार्टी।
  • यह आयोजन पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता और विरासत के दावे का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक अभूतपूर्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। दशकों तक ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का पर्याय रहे 'शहीद दिवस' (21 जुलाई) के आयोजन को लेकर अब राज्य में एक भीषण राजनीतिक युद्ध छिड़ गया है। यह संघर्ष केवल एक रैली का नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति पर नियंत्रण और पार्टी की वास्तविक विरासत पर दावेदारी का है।

विभाजित तृणमूल और सत्ता का संघर्ष

हालिया विधानसभा चुनावों के बाद, राज्य में विपक्षी भूमिका के लिए संघर्ष तेज हो गया है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने 40% वोट शेयर हासिल किया, लेकिन पार्टी के भीतर विद्रोह की आग भड़क चुकी है। विपक्षी नेता रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक बड़ा गुट, जिसमें 80 में से 65 से अधिक विधायक शामिल हैं, खुद को 'असली तृणमूल' घोषित कर रहा है। वहीं, एक अन्य समूह नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होकर केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करने की तैयारी में है।

शहीद दिवस का ऐतिहासिक महत्व

21 जुलाई का दिन पश्चिम बंगाल के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। 1993 में लेफ्ट फ्रंट सरकार के दौरान, वोटर आईडी कार्ड की मांग को लेकर मार्च कर रहे 13 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। उस समय ममता बनर्जी कांग्रेस में थीं। पिछले तीन दशकों से, यह दिन ममता बनर्जी के राजनीतिक उत्थान का प्रतीक बन गया है। उनके लिए यह रैली केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके समर्थकों को एकजुट करने और अपनी शक्ति दिखाने का सबसे बड़ा वार्षिक मंच रही है।

तीन रैलियां और बदलता राजनीतिक परिदृश्य

इस वर्ष की स्थिति असाधारण है। कोलकाता पुलिस द्वारा निषेधाज्ञा लागू किए जाने के बाद, तीन अलग-अलग गुटों को अलग-अलग स्थानों पर रैली करने की अनुमति मिली है। ममता बनर्जी का गुट बिरला तारामंडल (Birla Planetarium) के पास रैली करेगा, रिताब्रता बनर्जी का गुट मेयो रोड पर और कांग्रेस पार्टी शहीद मीनार के मैदान में अपना कार्यक्रम आयोजित करेगी। कांग्रेस पार्टी भी इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने और ममता बनर्जी की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा ठोकने की कोशिश कर रही है।