केरल में बढ़ते बिजली कटौती के दौर के बीच, विपक्ष के नेता पिणारई विजयन ने वर्तमान UDF सरकार पर योजना की कमी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में LDF सरकार ने बेहतर तैयारी से ऐसी स्थिति को टाला था।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केरल में वर्तमान में प्रतिदिन 300-600 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
  • विपक्ष के नेता पिणारई विजयन ने सरकार पर अल्पकालिक बिजली खरीद में विफलता का आरोप लगाया।
  • LDF सरकार ने ट्रांसग्रिड और एडमन-कोच्चि पावर हाईवे जैसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से बुनियादी ढांचे को मजबूत किया था।
  • चेमेनी में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर भी राजनीतिक विवाद गहरा गया है।

केरल में पिछले कुछ हफ्तों से हो रही अनियोजित बिजली कटौती ने राज्य में राजनीतिक घमासान छेड़ दिया है। विपक्ष के नेता पिणारई विजयन ने शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वर्तमान UDF सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे 'खराब योजना और तैयारी की कमी' का परिणाम बताया। विजयन ने कहा कि बिजली की यह समस्या अचानक नहीं आई है, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता का संकेत है।

बिजली संकट और प्रबंधन की विफलता

विजयन ने राज्य में बिजली की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को कटौती के समय के बारे में पहले से सूचित नहीं किया जा रहा है, जिससे आम जनता को भारी असुविधा हो रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य को प्रतिदिन 300 से 600 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। विजयन ने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास उच्च टैरिफ पर बिजली खरीदने की अनुमति है, तो उन्होंने जुलाई में केवल 150 मेगावाट की अल्पकालिक खरीद क्यों की? उनके अनुसार, यह स्पष्ट रूप से सरकार की योजना में स्पष्टता की कमी को दर्शाता है।

बुनियादी ढांचे का विकास बनाम वर्तमान स्थिति

पिछले दशक के कार्यों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने बताया कि LDF सरकार के दौरान ₹10,000 करोड़ के ट्रांसग्रिड प्रोजेक्ट और एडमन-कोच्चि पावर हाईवे जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के माध्यम से राज्य के बिजली क्षेत्र को सुदृढ़ किया गया था। उन्होंने दावा किया कि घरेलू उत्पादन में 2,092 मेगावाट की वृद्धि की गई थी, जिससे भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद मिली थी।

परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर विवाद

राजनीतिक बहस केवल बिजली की कमी तक सीमित नहीं है। बिजली मंत्री सनी जोसेफ द्वारा प्रस्तावित चेमेनी परमाणु ऊर्जा संयंत्र के विचार पर भी विजयन ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की परियोजना को व्यापक सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार ने भी इस प्रस्ताव पर विचार किया था, लेकिन सामाजिक और पर्यावरणीय कारणों से इसे टाल दिया गया था और आत्मनिर्भरता के अन्य माध्यमों पर ध्यान केंद्रित किया गया था।