मेघालय सरकार यूरेनियम खनन के विरोध में विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी। स्थानीय समूहों के भारी दबाव और रेडियोधर्मी खतरों की आशंका के बीच मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने राज्य की सुरक्षा का संकल्प लिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • मेघालय विधानसभा यूरेनियम खनन के खिलाफ एक औपचारिक प्रस्ताव पेश करेगी।
  • मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने कहा कि राज्य रेडियोधर्मी खतरों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
  • खसी छात्र संघ (KSU) और अन्य स्थानीय समूहों ने केंद्र सरकार की गतिविधियों पर कड़ा विरोध जताया है।
  • मेघालय में भारत के कुल यूरेनियम भंडार का लगभग 16% हिस्सा मौजूद है।

मेघालय की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया है। मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने घोषणा की है कि उनकी सरकार यूरेनियम खनन के खिलाफ 60 सदस्यीय विधानसभा में एक औपचारिक प्रस्ताव पेश करेगी। यह निर्णय केंद्र सरकार के हालिया बयानों और स्थानीय समुदायों के बढ़ते आक्रोश के बाद लिया गया है।

केंद्र के बयानों से उपजा विवाद

विवाद तब शुरू हुआ जब परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने संकेत दिया कि मेघालय में यूरेनियम खनन की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने 'सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया एक्ट' के तहत नए नियम बनाने की बात कही। स्थानीय समूहों, विशेष रूप से खसी छात्र संघ (KSU) ने इसे केंद्र की खनन परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की एक गुप्त योजना के रूप में देखा।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा

मुख्यमंत्री संगमा ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार (NPP के नेतृत्व में) राज्य की भूमि, जल और भविष्य को किसी भी रेडियोधर्मी खतरे के लिए नहीं सौंपेगी। दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स जिले के डोमियासियत जैसे क्षेत्र, जो यूरेनियम से समृद्ध हैं, वर्तमान में चर्चा के केंद्र में हैं। स्थानीय निवासियों को डर है कि खनन से उनके पर्यावरण, जंगलों और समुदायों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।

ऐतिहासिक संघर्ष और विरासत

मेघालय का यूरेनियम के खिलाफ संघर्ष कोई नया नहीं है। स्पिलिटी लिंगदोह लैंग्रिन जैसी महिलाओं ने दशकों तक इस आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने 1993 और फिर 2009 में भी खनन प्रयासों का कड़ा विरोध किया था। झारखंड के जादूगुड़ा में यूरेनियम खनन से होने वाले दुष्प्रभावों की कहानियों ने स्थानीय लोगों को जागरूक कर दिया है।

रणनीतिक महत्व बनाम स्थानीय अधिकार

आर्थिक दृष्टि से, मेघालय में लगभग 9.22 मिलियन टन यूरेनियम का भंडार है, जो भारत के कुल भंडार का 16% है। हालांकि, यह रणनीतिक संसाधन राज्य के लिए एक बड़ा संकट भी बन सकता है। स्थानीय समूहों ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली लोग यूरेनियम परियोजना की संभावना को देखते हुए ग्रामीणों से जमीनें खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जो भविष्य में बड़े विवाद का कारण बन सकता है।