चेन्नई पुलिस ने ₹35 करोड़ के कथित रिश्वत कांड की जांच में एक वरिष्ठ पत्रकार को हिरासत में लेकर उनका फोन जब्त कर लिया है। इस मामले में 'मेघालय प्रोजेक्ट' नामक एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • चेन्नई पुलिस ने टीवीके (TVK) विधायक को ₹35 करोड़ की रिश्वत देने के मामले में एक वरिष्ठ पत्रकार से पूछताछ की।
  • जांच में 'मेघालय प्रोजेक्ट' नामक एक कथित साजिश का पता चला है, जिसका उद्देश्य विधायकों को प्रभावित करना है।
  • पुलिस ने पत्रकार का मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया है।
  • चेन्नई प्रेस क्लब ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।

तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। चेन्नई पुलिस ने 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के विधायक को ₹35 करोड़ की रिश्वत देने के कथित प्रयास के मामले में एक वरिष्ठ पत्रकार से गहन पूछताछ की है। पुलिस ने पत्रकार के मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया है ताकि डिजिटल साक्ष्यों और 'आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक संचार' की जांच की जा सके।

क्या है 'मेघालय प्रोजेक्ट' की साजिश?

जांच के दौरान पुलिस ने 'मेघालय प्रोजेक्ट' (Meghalaya Project) नामक एक गुप्त कोड नाम वाली साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य लगभग 15 TVK विधायकों को भारी धन राशि का लालच देकर सरकार को अस्थिर करना था। यह मामला तब शुरू हुआ जब उथंगराई के विधायक एन इलैयाराजा ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के विरुद्ध मतदान करने के लिए ₹35 करोड़ का प्रस्ताव दिया गया था।

पत्रकार की भूमिका और पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि पत्रकार, जिनकी पहचान पुथिया थलैमुराई टेलीविजन के वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में हुई है, ने गिरफ्तार आरोपी तिरुनवक्करसु के साथ कथित साजिश के दौरान संपर्क बनाए रखा था। पुलिस का दावा है कि डिजिटल साक्ष्य दिखाते हैं कि दोनों के बीच संदिग्ध बातचीत हुई थी। आरोपी तिरुनवक्करसु, जो एक यूट्यूबर और IPDS नामक संस्था का संचालक है, पर विधायक को प्रभावित करने का आरोप है।

प्रेस जगत में आक्रोश

इस कार्रवाई के बाद चेन्नई प्रेस क्लब ने कड़ा विरोध जताया है। क्लब ने पुलिस के इस कदम को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई' करार दिया है। प्रेस क्लब ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच के नाम पर पत्रकारों को डराया-धमकाया न जाए और पत्रकार का फोन जल्द से जल्द वापस किया जाए।