पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस में विभाजन गहरा गया है। रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने पार्टी मुख्यालय पर कब्जा करने का दावा किया है, जिससे ममता बनर्जी के समर्थकों और विद्रोहियों के बीच टकराव बढ़ गया है।
मुख्य बातें
- रितब्रत बनर्जी के गुट ने कोलकाता स्थित तृणमूल भवन पर कब्जा करने का दावा किया।
- विद्रोही गुट का दावा है कि उनके पास 80 में से 65 विधायकों का समर्थन है।
- चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से संगठनात्मक चुनावों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
- ममता बनर्जी के वफादार नेताओं ने इस कब्जे को अवैध बताया है।
कोलकाता की सड़कों पर शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो गुटों के बीच संघर्ष खुलकर सामने आ गया। विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने ईएम बाईपास के पास स्थित पार्टी मुख्यालय पर कब्जा कर उसे लॉक कर दिया। इस दौरान बनर्जी के साथ फिरहाद हकीम और संदीपन साह जैसे कई विधायक भी मौजूद थे।
बनर्जी ने दावा किया कि वे ही असली तृणमूल हैं और यह कार्यालय उनके समर्थकों की भावनाओं से जुड़ा है। उन्होंने संपत्ति के मालिक के साथ किराए से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने का भी उल्लेख किया। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वफादार नेता कुणाल घोष और बैस्वंतर चटर्जी ने तुरंत मौके पर पहुंचकर इस कब्जे का विरोध किया। चटर्जी ने स्पष्ट किया कि पार्टी का किराया समझौता अक्टूबर 2027 तक वैध है और ममता बनर्जी के बिना कोई तृणमूल नहीं है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह आंतरिक कलह केवल सत्ता का संघर्ष नहीं है, बल्कि पार्टी की संरचनात्मक वैधता पर एक गंभीर संकट है। यदि विद्रोहियों का दावा सही साबित होता है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा शक्ति परिवर्तन ला सकता है।
"तृणमूल के भीतर यह विभाजन पार्टी की संगठनात्मक नींव को हिला सकता है, विशेषकर तब जब चुनाव आयोग इस मामले में हस्तक्षेप कर रहा है।"
विवाद तब और बढ़ गया जब विद्रोहियों ने इमारत पर नए अध्यक्ष अरूप रॉय की तस्वीर वाला बैनर लगा दिया। यह घटनाक्रम दिल्ली में चुनाव आयोग (ECI) के साथ रितब्रत बनर्जी की बैठक के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जहाँ उन्होंने पार्टी पर अपना दावा पेश किया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तृणमूल कांग्रेस लंबे समय तक ममता बनर्जी के व्यक्तिगत नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है। हालांकि, हाल के वर्षों में पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों और नेतृत्व की आकांक्षाओं ने आंतरिक तनाव पैदा किया है, जो अब एक खुले संघर्ष में बदल गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. रितब्रत बनर्जी के गुट के पास कितने विधायकों का समर्थन है?
विद्रोही गुट का दावा है कि उनके पास कुल 80 विधायकों में से 65 का समर्थन है।
2. चुनाव आयोग की इस मामले में क्या भूमिका है?
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से संगठनात्मक चुनावों और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के संबंध में जवाब मांगा है।