तमिलनाडु सरकार ने मंदिर कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। मंत्री रमेश ने घोषणा की है कि अब सभी टेंडर ऑनलाइन होंगे और पार्किंग शुल्क के लिए डिजिटल बिलिंग लागू की जाएगी।

मुख्य बातें

  • मंदिरों के सभी टेंडर अब पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से जारी किए जाएंगे।
  • पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जीएसटी (GST) और पैन (PAN) अनिवार्य कर दिया गया है।
  • मंदिरों में पार्किंग शुल्क की अनियमितता रोकने के लिए डिजिटल बिलिंग प्रणाली लागू होगी।
  • पलानी भूमि घोटाले की जांच सीबीआइडी (CB-CID) को सौंपने की सिफारिश की गई है।

तमिलनाडु के मंत्री रमेश ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार की घोषणा करते हुए कहा है कि अब राज्य के सभी मंदिरों से जुड़े कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया गया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम बड़े ठेकेदारों के एकाधिकार को समाप्त करने और छोटे व्यापारियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए उठाया गया है।

नई टेंडर प्रक्रिया की विशेषताएं

नई नीति के तहत, हिंदू धार्मिक और धर्मार्थendowments (HR&CE) विभाग के सभी टेंडर अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित किए जाएंगे। टेंडर आवेदन के लिए एक समान प्रारूप (Uniform Format) तैयार किया गया है, जो तमिल और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होगा। इस प्रक्रिया में बोली लगाने (Bidding) से लेकर नीलामी तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संपन्न होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, प्रत्येक टेंडर प्रक्रिया में GST और PAN कार्ड का होना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे सरकार को यह ट्रैक करने में मदद मिलेगी कि सेवाओं की कीमतें उचित हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसरों में पार्किंग शुल्क को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद, सरकार ने डिजिटल बिलिंग प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि यात्रियों से अवैध वसूली न हो सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मंदिर प्रबंधन में डिजिटलीकरण न केवल भ्रष्टाचार को कम करेगा, बल्कि सरकारी राजस्व में भी वृद्धि करेगा। डिजिटल फुटप्रिंट के माध्यम से, विभाग अब प्रत्येक लेनदेन की वास्तविक समय में निगरानी कर सकेगा, जिससे मंदिर प्रशासन में जनता का विश्वास बढ़ेगा।

डिजिटलीकरण केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का एक सशक्त माध्यम है।

पलानी भूमि विवाद पर स्पष्टीकरण

मंत्री रमेश ने पलानी भूमि घोटाले की जांच के संदर्भ में भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री विजय से इस मामले को CB-CID को सौंपने का आग्रह किया है ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें उनके परिवार के सदस्यों पर भूमि घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ फैलाए जा रहे दुष्प्रचार निराधार हैं।

क्या आप जानते हैं?: डिजिटल टेंडरिंग प्रणाली से सरकारी खरीद प्रक्रिया में लगने वाले समय और कागजी कार्रवाई में 40% तक की कमी आती है।

Frequently Asked Questions

1. क्या मंदिर टेंडर के लिए अब व्यक्तिगत रूप से जाना होगा?
नहीं, अब सभी टेंडर प्रक्रियाएं और बोलियां ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आयोजित की जाएंगी।

2. टेंडर के लिए कौन से दस्तावेज अनिवार्य हैं?
टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए GST और PAN कार्ड होना अनिवार्य है।