मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष सुधार समिति का गठन किया है। यह समिति भर्ती प्रक्रियाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के ढांचे में बदलाव लाएगी।

मुख्य बातें

  • 70,000 से अधिक रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।
  • पूर्व मुख्य सचिव एस.वी. रंगनाथ की अध्यक्षता में सुधार समिति का गठन।
  • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए UPSC मॉडल अपनाने पर जोर।
  • अगले छह महीनों में 36,773 पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।

बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार लाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें राज्य सरकार के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं की तैयारियों की समीक्षा की गई।

इस महत्वपूर्ण सुधार के तहत, सरकार ने 'प्रतियोगी परीक्षा और भर्ती सुधार समिति' का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व मुख्य सचिव एस.वी. रंगनाथ करेंगे। समिति में पूर्व मुख्य सचिव टी.एम. विजयभास्कर, वंदिता शर्मा और मुख्यमंत्री के वित्तीय सलाहकार एल.के. अतीक शामिल हैं। इस समिति का मुख्य कार्य प्रतियोगी परीक्षाओं के ढांचे और भर्ती प्रक्रियाओं की खामियों को दूर करना होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कर्नाटक में हाल के वर्षों में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर कई विवाद हुए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 70,000 से अधिक पदों की भर्ती में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। KPSC और KEA द्वारा अगले छह महीनों में 36,773 पदों को भरने के लिए परीक्षाएं निर्धारित की गई हैं, जिनमें लगभग 35 लाख उम्मीदवारों के शामिल होने की उम्मीद है।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए UPSC के सर्वोत्तम मॉडलों को अपनाना एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जाना चाहिए। बैठक में गृह और आईटी-बीटी मंत्री प्रियंक खड़गे और मुख्य सचिव शालिनी रजनीश भी उपस्थित थे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। समय-समय पर पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, जिसके कारण अब सरकार एक स्थायी सुधार तंत्र बनाने की कोशिश कर रही है।

क्या आप जानते हैं?: कर्नाटक में आगामी परीक्षाओं के लिए लगभग 35 लाख अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों पर पहुंच सकते हैं, जो राज्य के इतिहास में एक बहुत बड़ा आयोजन होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: नई सुधार समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना और सुधार करना है।

प्रश्न 2: किन पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं?
उत्तर: अगले छह महीनों में 36,773 रिक्त पदों को भरने के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।