पंजाब सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को प्रदर्शित करने वाली एक झांकी विवादों में घिर गई है, जहाँ घुटने के ऑपरेशन के 'सफल लाभार्थियों' के रूप में नाच रहे लोग वास्तव में विभाग के ही रिटायर्ड कर्मचारी निकले।
- फिरोजपुर में स्वतंत्रता दिवस परेड के दौरान स्वास्थ्य विभाग की झांकी में फर्जी लाभार्थियों का प्रदर्शन किया गया।
- घुटने के रिप्लेसमेंट के दावे करने वाले पांच व्यक्ति वास्तव में स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त ड्राइवर और कर्मचारी थे।
- विपक्ष ने इसे 'नाटकीय शासन' बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
पंजाब के फिरोजपुर में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान एक बेहद अजीबोगरीब और विवादित घटना सामने आई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की उपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक झांकी पेश की गई, जिसका उद्देश्य 'मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना' की सफलताओं को प्रदर्शित करना था। झांकी के दौरान उद्घोषक ने घोषणा की कि भांगड़ा कर रहे पांच व्यक्ति वे लाभार्थी हैं जिन्होंने इस योजना के तहत घुटने के रिप्लेसमेंट (Knee Replacement) सर्जरी करवाई है।
हालांकि, जैसे ही यह खबर फैली, सच्चाई सामने आई कि ये पांचों व्यक्ति कोई मरीज या योजना के लाभार्थी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के ही सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। इनमें चार सेवानिवृत्त ड्राइवर और एक सेवानिवृत्त मल्टीपर्पज वर्कर शामिल थे। एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने मीडिया को बताया कि उनके घुटनों का कोई ऑपरेशन नहीं हुआ है और उन्हें केवल प्रदर्शन के लिए बुलाया गया था।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना सरकारी प्रचार और जमीनी हकीकत के बीच के गहरे अंतर को उजागर करती है। जब सरकारें वास्तविक डेटा के बजाय 'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation) का सहारा लेती हैं, तो यह जनता के विश्वास को कम करता है। स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में इस तरह का दिखावा प्रशासनिक लापरवाही और नैतिक विफलता को दर्शाता है।
विवाद बढ़ने पर फिरोजपुर की सिविल सर्जन डॉ. मीनाक्षी ढींगरा ने बचाव करते हुए कहा कि प्रतिभागियों को केवल प्रतीकात्मक रूप से पेश किया गया था और उन्हें वास्तविक मरीजों के रूप में नहीं दिखाया गया। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस विवाद को खारिज करते हुए कहा कि उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना था। उन्होंने दावा किया कि अब तक 9,971 लोगों ने इस योजना के तहत घुटने के ऑपरेशन करवाए हैं, जिस पर सरकार ने लगभग 79 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
"सरकारी योजनाओं का प्रचार वास्तविक लाभार्थियों के माध्यम से होना चाहिए, न कि वेतनभोगी या पूर्व कर्मचारियों के अभिनय के माध्यम से, क्योंकि यह शासन की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।"
इस घटना ने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस नेता पार्थब सिंह बाजवा और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने इसे 'आप मॉडल' का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह सरकार केवल बड़े दावों और प्रचार में विश्वास रखती है। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी इसे 'झूठा प्रचार' करार दिया और कहा कि पंजाब के अस्पतालों को प्रचार के बजाय डॉक्टरों और दवाओं की जरूरत है।
प्रश्न 1: विवाद का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: स्वतंत्रता दिवस की झांकी में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्वास्थ्य योजना के लाभार्थी बताकर घुटने के ऑपरेशन के बाद भांगड़ा करते हुए दिखाया गया।
प्रश्न 2: सरकार का इस पर क्या स्पष्टीकरण है?
उत्तर: सरकार का कहना है कि यह केवल एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन था जिसका उद्देश्य लोगों को योजना के लाभों के प्रति जागरूक करना था।