त्रिपुरा के प्रमुख आदिवासी नेता और पूर्व लोकसभा सांसद रेबती त्रिपुरा ने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली है और वे अब राजनीति विज्ञान के शिक्षक के रूप में अपना करियर फिर से शुरू कर रहे हैं।
मुख्य बातें
- पूर्व भाजपा सांसद रेबती त्रिपुरा ने सक्रिय राजनीति से ब्रेक लिया है।
- वे अब अगरतला के महात्मा गांधी मेमोरियल हायर सेकेंडरी स्कूल में राजनीति विज्ञान के पीजीटी के रूप में शामिल हुए हैं।
- हाल ही में भाजपा के पुनर्गठित राज्य समिति में उन्हें कोई वरिष्ठ पद नहीं मिला।
त्रिपुरा के राजनीति परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व लोकसभा सांसद रेबती त्रिपुरा ने सक्रिय राजनीति से विराम लेते हुए अपने पुराने पेशे, शिक्षण की ओर लौटने का निर्णय लिया है। उन्होंने अगरतला के महात्मा गांधी मेमोरियल हायर सेकेंडरी स्कूल में राजनीति विज्ञान विषय के स्नातकोत्तर शिक्षक (PGT) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।
रेबती त्रिपुरा उन गिने-चुने आदिवासी नेताओं में से एक थे, जिन्होंने भाजपा को पहाड़ी क्षेत्रों और आंतरिक आदिवासी समुदायों में संगठन मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, हाल ही में भाजपा द्वारा पुनर्गठित की गई राज्य समिति में उन्हें कोई वरिष्ठ स्थान नहीं मिल सका, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे थे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि त्रिपुरा में भाजपा की रणनीति में बदलाव सीधे तौर पर स्थानीय आदिवासी नेतृत्व को प्रभावित कर रहा है। भाजपा द्वारा तिप्रा Motha पार्टी के साथ गठबंधन की नीति ने पुराने वफादार आदिवासी नेताओं के लिए राजनीतिक स्थान को सीमित कर दिया है। रेबती त्रिपुरा का राजनीति से हटना राज्य में आदिवासी वोट बैंक के बदलते समीकरणों का संकेत है।
राजनीति में गठबंधन की नई रणनीतियां अक्सर उन पुराने योद्धाओं को हाशिए पर धकेल देती हैं जिन्होंने जमीनी स्तर पर पार्टी का निर्माण किया था।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भी रेबती त्रिपुरा को पूर्व पूर्वी त्रिपुरा (ST) निर्वाचन क्षेत्र से टिकट नहीं दिया गया था। पार्टी ने कृति देवी देबबरमन को मैदान में उतारा था, जिन्हें तिप्रा Motha पार्टी का समर्थन प्राप्त था। यह निर्णय भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था ताकि वह क्षेत्रीय शक्ति के साथ तालमेल बिठा सके, लेकिन इसने पार्टी के पुराने आदिवासी आधार को एक झटका भी दिया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
रेबती त्रिपुरा ने 2019 से 2024 तक लोकसभा सांसद के रूप में सेवा दी। इस दौरान उन्होंने तिप्रा Motha पार्टी की राजनीति की आलोचना की थी, जबकि भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता अधिक सतर्क रुख अपनाते रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: रेबती त्रिपुरा अब क्या कर रहे हैं?
उत्तर: वे अब अगरतला में एक उच्च माध्यमिक विद्यालय में राजनीति विज्ञान के शिक्षक के रूप में काम कर रहे हैं।
प्रश्न 2: रेबती त्रिपुरा किस पार्टी से जुड़े थे?
उत्तर: वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रमुख आदिवासी नेता और पूर्व सांसद थे।