नई दिल्ली के जंतर मंतर को अब प्रदर्शन स्थल मानने पर सवाल उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक सार्वजनिक हित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई करने को स्वीकार किया। कोर्ट ने केंद्र और संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब माँगा है।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाना अब उपयुक्त नहीं मानने की याचिका पर सुनवाई की स्वीकृति दी।
  • पीआईएल में स्थानीय निवासियों की असुविधा और आवश्यक सेवाओं में बाधा के मुद्दे उठाए गए हैं।
  • कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली पुलिस और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का विवरण

नई दिल्ली – 3 अगस्त, 2026 को, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) को सुनने की स्वीकृति दी, जिसमें यह तर्क दिया गया कि जंतर मंतर अब प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थल नहीं रहा। यह याचिका सतीश चंद कौशिक द्वारा दायर की गई थी, जिसमें निवासियों की असुविधा और आवश्यक वस्तुओं व चिकित्सा सेवाओं की आपूर्ति में बाधा का उल्लेख किया गया।

मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जे.बी. बघेल, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। साथ ही, उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुशार मेहता को संबंधित अधिकारियों से निर्देश लेने का आदेश दिया।

विचार-विमर्श के प्रमुख बिंदु

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “जंतर मंतर में प्रवेश‑निकास की समस्याएँ और आवश्यक सेवाओं पर प्रभाव इसे अब उपयुक्त स्थल नहीं बनाते।” उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत निर्देश लेना आवश्यक है।

पेटिशनर के वकील ने एक संभावित राजनीतिक मार्च का उल्लेख किया, जिसमें अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करने की योजना का हवाला दिया गया। हालांकि, बेंच ने इस प्रस्ताव पर कोई टिप्पणी नहीं की और इसे अलग से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जंतर मंतर, 1854 में बना एक ऐतिहासिक वेधशाला, 2010 के बाद से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल बन गया। 2011 में भारत सरकार के खिलाफ एटीएम बंदी, 2015 में जलवायु परिवर्तन पर मार्च, और 2020 में नागरिक अधिकारों की मांगों ने इस स्थान को राष्ट्रीय मंच बना दिया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that यदि जंतर मंतर को प्रतिबंधित किया गया तो विरोध प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक स्थानों की खोज तेज़ होगी, जिससे सार्वजनिक अभिव्यक्ति की सीमाएँ पुनः परिभाषित हो सकती हैं।

"यदि कोर्ट जंतर मंतर को प्रतिबंधित करता है, तो यह लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति पर एक नया प्रीसेडेंट सेट कर सकता है," कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ डॉ. रमेश शर्मा।
Did You Know?: जंतर मंतर में पहले 2012 में भारत के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन में 1.5 लाख से अधिक लोग शामिल हुए थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या जंतर मंतर को पूरी तरह बंद किया जाएगा?

उत्तर: अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है; कोर्ट केवल वैकल्पिक स्थानों की संभावनाओं की जाँच कर रहा है।

प्रश्न 2: इस याचिका का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: स्थानीय निवासियों की असुविधा कम करना और आवश्यक सेवाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना।