कर्नाटक में कांग्रेस की जीत का श्रेय महिला मतदाताओं को जाता है, लेकिन मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नए मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री को जगह नहीं मिली है। इस फैसले ने पार्टी की महिला सशक्तिकरण की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के 33 सदस्यीय मंत्रिमंडल में एक भी महिला शामिल नहीं है।
- हाईकमान की सूची में शामिल एकमात्र महिला MLC गायत्री शान्तेगौड़ा को अंतिम समय पर हटा दिया गया।
- कांग्रेस की 'शक्ति' और 'गृह लक्ष्मी' जैसी योजनाएं महिलाओं के दम पर सफल हुईं, लेकिन सत्ता में उनका प्रतिनिधित्व शून्य है।
बेंगलुरु: कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) द्वारा किए गए हालिया कैबिनेट विस्तार ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जहाँ एक ओर कांग्रेस ने 'शक्ति' और 'गृह लक्ष्मी' जैसी महिला-केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं के दम पर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, वहीं दूसरी ओर नए मंत्रिमंडल में महिलाओं की अनुपस्थिति ने पार्टी की कथनी और करनी के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है।
जातिगत समीकरण और गुटबाजी का शिकार बनीं महिलाएँ
कैबिनेट विस्तार के दौरान सबसे बड़ा झटका MLC गायत्री शान्तेगौड़ा (Gayathri Shanthegowda) को लगा। कांग्रेस हाईकमान द्वारा अनुमोदित 20 नामों की सूची में वह एकमात्र महिला थीं, लेकिन शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय तकनीकी कारणों से नहीं, बल्कि शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच चल रही गुटबाजी और जातिगत गणित का परिणाम है।
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के 33 सदस्यीय मंत्रिमंडल में एक भी महिला शामिल नहीं है।
- हाईकमान की सूची में शामिल एकमात्र महिला MLC गायत्री शान्तेगौड़ा को अंतिम समय पर हटा दिया गया।
- कांग्रेस की 'शक्ति' और 'गृह लक्ष्मी' जैसी योजनाएं महिलाओं के दम पर सफल हुईं, लेकिन सत्ता में उनका प्रतिनिधित्व शून्य है।
BozokMedia विश्लेषण: सत्ता का असंतुलन
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कर्नाटक कांग्रेस वर्तमान में एक गहरे आंतरिक संघर्ष से जूझ रही है। सत्ता का संतुलन बनाने के प्रयास में पार्टी ने महिला प्रतिनिधित्व जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को हाशिए पर रख दिया है। यह न केवल भाजपा को राजनीतिक हमला करने का मौका देता है, बल्कि कांग्रेस के उस नैरेटिव को भी कमजोर करता है जिसमें वह खुद को महिलाओं का मसीहा बताती है।
सत्ता में महिलाओं की शून्य भागीदारी यह दर्शाती है कि राजनीतिक दल केवल वोट बैंक के रूप में महिलाओं का उपयोग करते हैं, निर्णय लेने की प्रक्रिया में नहीं।
गौरतलब है कि पिछले मंत्रिमंडल में लक्ष्मी हेब्बालकर (Lakshmi Hebbalkar) जैसी महिला मंत्री शामिल थीं, जिन्हें इस बार हटा दिया गया है। चुनाव आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में लगभग 44% महिलाओं ने कांग्रेस को वोट दिया था, फिर भी विधायी सभा में महिलाओं की संख्या 5% से भी कम है।
क्या आप जानते हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. गायत्री शान्तेगौड़ा को मंत्रिमंडल से क्यों हटाया गया?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह निर्णय शिवकुमार और सिद्धारमैया के गुटों के बीच चल रही खींचतान और राजनीतिक सौदेबाजी का परिणाम था।
2. कर्नाटक विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कितना है?
वर्तमान में 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में केवल 10 महिला विधायक हैं, जो कुल संख्या का 5% से भी कम है।