विपक्ष के भारी हंगामे के बीच लोकसभा ने 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026' पारित कर दिया है, जिससे अब डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड को अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया जा सकेगा। यह नया कानून 1891 के पुराने कानून की जगह लेगा।

मुख्य बातें

  • लोकसभा ने 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026' को बिना किसी चर्चा के पारित किया।
  • अब डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड को अदालत में कानूनी सबूत माना जाएगा।
  • यह नया कानून 135 साल पुराने 1891 के अधिनियम को प्रतिस्थापित करेगा।
  • विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच वॉयस वोट से बिल पास हुआ।

नई दिल्ली में बुधवार को भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, लोकसभा ने एक ऐतिहासिक विधेयक पारित किया जो भारत के डिजिटल बैंकिंग और कानूनी ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा। बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026 के पारित होने के साथ ही, अब डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड को अदालतों में साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा।

यह विधेयक 1891 के पुराने कानून को पूरी तरह से निरस्त कर देगा। सदन में कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे चर्चा की स्थिति पैदा नहीं हो सकी। अंततः, अध्यक्ष द्वारा वॉयस वोट के माध्यम से इस महत्वपूर्ण कानून को पारित कर दिया गया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे भारत एक डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, कागजी दस्तावेजों के बजाय डिजिटल साक्ष्यों की कानूनी मान्यता अनिवार्य हो गई है। यह कदम बैंकिंग धोखाधड़ी, साइबर अपराध और डिजिटल लेनदेन के मामलों में न्याय प्रक्रिया को तेज और आधुनिक बनाएगा।

डिजिटल युग में, भौतिक दस्तावेजों की जगह वर्चुअल रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देना न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अनिवार्य कदम है।

सदन में हंगामे के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता सदन की गरिमा बनाए रखने में विफल रहे हैं। विपक्ष मुख्य रूप से नीट (NEET) पेपर लीक मामले और अन्य सामाजिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में बैंकिंग साक्ष्यों को लेकर कानून 1891 से संचालित हो रहा था। उस समय बैंकिंग का स्वरूप पूरी तरह से भौतिक रजिस्टरों और कागजी प्रविष्टियों पर आधारित था। आज के क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल डेटा के युग में, वह कानून अप्रासंगिक हो चुका था, जिसे अब 2026 के इस नए कानून द्वारा सुधारा गया है।

क्या आप जानते हैं?: डिजिटल साक्ष्यों को कानूनी रूप से मान्य बनाने से बैंकिंग विवादों के निपटारे में लगने वाले समय में 40% तक की कमी आ सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. यह नया बिल पुराने कानून की जगह क्यों ले रहा है?
क्योंकि 1891 का कानून केवल भौतिक दस्तावेजों तक सीमित था, जबकि वर्तमान बैंकिंग पूरी तरह डिजिटल है।

2. क्या अब डिजिटल ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट सबूत बन सकेंगे?
हाँ, इस कानून के तहत डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड को अदालत में साक्ष्य के रूप में मान्यता दी गई है।