केरल सरकार ने राज्य संचालित फार्मास्युटिकल कंपनी 'औषधी' में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने विभागीय जांच के साथ-साथ विजिलेंस जांच की भी मांग की है।
मुख्य बिंदु
- औषधी में निर्माण अनुबंधों, खरीद और लेखांकन में गड़बड़ी के आरोप।
- स्वास्थ्य मंत्री ने वित्त निरीक्षण विंग को विस्तृत जांच का निर्देश दिया।
- विजिलेंस और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (VACB) से प्रारंभिक जांच की मांग।
- बिक्री के आंकड़ों में हेरफेर और फर्जी स्टॉक दिखाने का गंभीर आरोप।
केरल सरकार ने आयुष विभाग के तहत राज्य संचालित फार्मास्युटिकल कंपनी, औषधी (Oushadhi) में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर एक विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस जांच के लिए भी गृह मंत्री रमेश चिनथला को पत्र लिखा है।
यह कार्रवाई थ्रिसूर स्थित मानवाधिकार संगठन 'नेरकाझा' के निदेशक पी.बी. सतीश द्वारा दायर एक शिकायत के बाद की गई है। शिकायत में निर्माण अनुबंधों, खरीद प्रक्रियाओं, वित्तीय प्रबंधन और लेखांकन प्रथाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की विश्वसनीयता पर भी गहरा प्रहार है। सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता की कमी भविष्य में बड़े वित्तीय संकटों को जन्म दे सकती है।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि जनता के पैसे का दुरुपयोग न हो।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई निर्माण कार्य, जैसे कि विनिर्माण संयंत्र और वेयरहाउस का नवीनीकरण, निर्धारित निविदा (tender) प्रक्रियाओं का पालन किए बिना ही Uralungal Labour Contract Co-operative Society (ULCCS) को सौंप दिए गए। इसके अलावा, यह भी आरोप है कि औषधी ने 2024-25 के लिए अपनी बिक्री के आंकड़ों को बढ़ाने के लिए फर्जी इन्वेंट्री प्रविष्टियाँ बनाईं।
तुलनात्मक विश्लेषण: आरोप बनाम स्पष्टीकरण
| विषय | शिकायतकर्ता के आरोप | प्रबंधन का पक्ष |
|---|---|---|
| निविदा प्रक्रिया | बिना ओपन टेंडर के सीधे अनुबंध दिए गए। | सभी कार्य वित्त विभाग की मंजूरी के साथ नियमानुसार हुए। |
| बिक्री के आंकड़े | मार्च 2025 में ₹46 करोड़ की फर्जी बिक्री दिखाई गई। | प्रबंधन ने किसी भी वित्तीय अनियमितता से इनकार किया है। |
| बकाया राशि | डीलरों से ₹5.52 करोड़ की वसूली लंबित है। | प्रबंधन को फिलहाल किसी जांच की जानकारी नहीं है। |
औषधी की प्रबंध निदेशक पी.एम. लठाकुमारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस विभागीय जांच के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। वहीं, ULCCS के सूत्रों ने भी स्पष्ट किया कि सभी कार्य निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत और उत्पादन में बाधा डाले बिना पूरे किए गए हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
औषधी केरल सरकार के आयुष विभाग के तहत एक प्रमुख संस्थान है, जो पारंपरिक दवाओं के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पिछले कुछ वर्षों में, सार्वजनिक उपक्रमों में प्रशासनिक सुधारों की मांग अक्सर उठती रही है।
Frequently Asked Questions
1. औषधी में मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए गए हैं?
मुख्य आरोप निर्माण अनुबंधों में अनियमितता, निविदा प्रक्रियाओं का उल्लंघन और बिक्री के आंकड़ों में हेरफेर करने के हैं।
2. सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
स्वास्थ्य मंत्री ने वित्त निरीक्षण विंग के माध्यम से विभागीय जांच और विजिलेंस ब्यूरो से प्रारंभिक जांच की मांग की है।