संसद के मानसून सत्र के दौरान केरल के सांसद पीवी अब्दुल वहाब के पहनावे को लेकर एक दिलचस्प बहस छिड़ गई। मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य सांसदों ने उन्हें 'मुंडू' पहनने की सलाह दी, जिससे गलियारों में चर्चा का माहौल बन गया।
मुख्य बातें
- केरल के सांसद पीवी अब्दुल वहाब को संसद में 'मुंडू' के बजाय 'कुर्ता-पायजामा' पहने देख अन्य सांसदों ने सवाल उठाए।
- संसद लॉबी में सांसदों के बीच पहनावे को लेकर एक अनौपचारिक लेकिन रोचक चर्चा हुई।
- मानसून सत्र के अंतिम दिन कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण मुलाकात देखी गई।
संसद के गलियारों में अक्सर राजनीति के साथ-साथ संस्कृति और परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है। गुरुवार को कुछ ऐसा ही हुआ जब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद पीवी अब्दुल वहाब संसद पहुंचे। वहाब ने पारंपरिक 'कुर्ता-पायजामा' पहना था, जिसे देख कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य सांसदों ने उनसे पूछा कि वह केरल के अन्य सांसदों की तरह 'मुंडू' क्यों नहीं पहने हुए हैं।
बताया जा रहा है कि वहाब, जो बुधवार को सदन में उपस्थित नहीं थे, पहनावे को लेकर चल रहे इस विवाद से अनजान थे। जब साथी सांसदों ने उन्हें 'धोती' (मुंडू का विकल्प) देने की पेशकश की, तो उन्होंने अपने पायजामे के ऊपर उसे लपेट लिया। हालांकि, जल्द ही उन्हें यह व्यवस्था काफी असुविधाजनक लगी और उन्होंने धोती को मोड़कर राज्यसभा कक्ष में अपनी सीट के सामने मेज पर रख दिया। बाद में, भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने धोती की मांग की, जिस पर वहाब ने खुशी-खुशी उन्हें वह दे दी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि भारतीय संसद केवल कानून बनाने का केंद्र नहीं है, बल्कि यह भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान का एक जीवंत मंच भी है। पहनावे को लेकर होने वाली ऐसी छोटी-मोटी बहसें दर्शाती हैं कि कैसे क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय पहचान के बीच का संतुलन संसद के भीतर भी महसूस किया जाता है।
संसद में पहनावा केवल व्यक्तिगत पसंद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय गौरव और सांस्कृतिक पहचान का एक सूक्ष्म प्रदर्शन भी होता है।
एक तरफ जहां पहनावे पर चर्चा चल रही थी, वहीं दूसरी ओर मानसून सत्र के समापन पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच मानवता की एक सुंदर झलक भी देखने को मिली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और भाजपा के जगदंबिका पाल, जो सत्र के दौरान अक्सर एक-दूसरे के विरोधी रहे, सत्र की समाप्ति पर गलियारे में मिले और गर्मजोशी से हाथ मिलाया। वेणुगोपाल ने पाल से अपना ख्याल रखने का आग्रह किया, जो राजनीति में आपसी सम्मान का एक दुर्लभ क्षण था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय संसद में पहनावे को लेकर नियम बहुत सख्त नहीं हैं, लेकिन पारंपरिक परिधानों का उपयोग हमेशा से सांसदों की क्षेत्रीय जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक रहा है। दक्षिण भारतीय सांसद अक्सर 'मुंडू' या 'वेष्टी' पहनते हैं, जबकि उत्तर भारतीय सांसद 'कुर्ता-पायजामा' या 'धोती' को प्राथमिकता देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या संसद में ड्रेस कोड अनिवार्य है?
नहीं, संसद में कोई सख्त ड्रेस कोड नहीं है, लेकिन सांसद आमतौर पर पारंपरिक और औपचारिक भारतीय परिधान पहनना पसंद करते हैं।
2. 'मुंडू' क्या है?
मुंडू दक्षिण भारत, विशेष रूप से केरल में पहना जाने वाला एक पारंपरिक परिधान है, जो धोती के समान होता है।