आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री पाय्यवुला केशव ने खुलासा किया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के चलते राज्य को ₹38,000 करोड़ के अनुदान का नुकसान हुआ है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अमरावती और पोलावरम जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की है।

  • 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के कारण आंध्र प्रदेश को ₹38,000 करोड़ के केंद्रीय अनुदान का नुकसान हुआ।
  • अमरावती के निर्माण के लिए ₹15,000 करोड़ और पोलावरम परियोजना के लिए ₹12,157 करोड़ स्वीकृत।
  • राजकोषीय घाटा 2014-19 के ₹16,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 तक ₹48,000 करोड़ होने का अनुमान है।
  • पिछली सरकार द्वारा ₹50,000 करोड़ के अनुदान का अग्रिम उपयोग राज्य के लिए वित्तीय संकट का कारण बना।

आंध्र प्रदेश की विधानसभा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान, वित्त मंत्री पाय्यवुला केशव ने राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग (FC) की सिफारिशों के बाद राज्य को लगभग ₹38,000 करोड़ के केंद्रीय अनुदान से हाथ धोना पड़ा है। यह राशि राज्य के राजस्व घाटे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती थी, जो 2014-19 के ₹16,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹48,000 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।

मंत्री केशव ने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल आंध्र प्रदेश की नहीं है, बल्कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से लगभग सभी राज्य प्रभावित हुए हैं। हालांकि, आंध्र प्रदेश की स्थिति अधिक जटिल है क्योंकि पिछली सरकार ने 2024-25 और 2025-26 के लिए निर्धारित 15वें वित्त आयोग के अनुदानों सहित लगभग ₹50,000 करोड़ पहले ही निकाल लिए थे, जिससे वर्तमान प्रशासन के सामने नकदी का संकट पैदा हो गया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि आंध्र प्रदेश वर्तमान में एक गहरे 'राजकोषीय जाल' (Fiscal Trap) में फंसा हुआ है। एक तरफ पिछले प्रशासन द्वारा संसाधनों का अग्रिम उपयोग और दूसरी तरफ वित्त आयोग के नए नियमों ने राज्य की विकास गति को धीमा कर दिया है। केंद्र सरकार द्वारा दी गई विशेष सहायता केवल एक 'बैंड-एड' समाधान है; दीर्घकालिक स्थिरता के लिए राज्य को अपने राजस्व मॉडल में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे।

"राजकोषीय अनुशासन की कमी और अनुदानों का समय से पहले उपयोग किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकता है, जैसा कि वर्तमान में आंध्र प्रदेश में देखा जा रहा है।"

वित्तीय संकट के बावजूद, केंद्र सरकार ने राज्य की मांगों पर विचार करते हुए कुछ बड़े पैकेज जारी किए हैं। इनमें अमरावती राजधानी के निर्माण के लिए ₹15,000 करोड़ और पोलावरम परियोजना के लिए ₹12,157 करोड़ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 'राज्यों के लिए पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता' (SASCI) योजना के तहत 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण प्रदान किए गए हैं, जो 2024-25 में ₹7,900 करोड़ और 2025-26 में ₹8,255 करोड़ तक हैं।

विकास के अन्य मोर्चों पर, केंद्र ने रायलसीमा ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के लिए ₹10,000 करोड़ के योगदान पर सैद्धांतिक मंजूरी दी है। साथ ही, विशाखापत्तनम आर्थिक क्षेत्र (Visakhapatnam Economic Region) के लिए PPP मोड में ₹8 लाख करोड़ के निवेश वाले 49 प्रोजेक्ट्स की योजना है। मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के हस्तक्षेप से YSRCP सरकार द्वारा लिए गए उच्च ब्याज वाले ऋणों (13.50%) को कम करने में मदद मिली, जिससे सालाना ₹1,100 करोड़ की बचत हुई है।

परियोजना/क्षेत्र केंद्र द्वारा स्वीकृत राशि/सहायता
अमरावती निर्माण ₹15,000 करोड़
पोलावरम परियोजना ₹12,157 करोड़
रायलसीमा हॉर्टिकल्चर हब ₹10,000 करोड़
RINL निवेश ₹10,300 करोड़
क्या आप जानते हैं?: आंध्र प्रदेश का राजस्व घाटा पिछले एक दशक में लगभग तीन गुना बढ़ गया है, जो राज्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भारी निर्भरता को दर्शाता है।

Frequently Asked Questions

1. 16वें वित्त आयोग ने आंध्र प्रदेश को कैसे प्रभावित किया?
सिफारिशों के कारण राज्य को मिलने वाले केंद्रीय अनुदानों में ₹38,000 करोड़ की कमी आई है, जिससे राजस्व घाटा बढ़ा है।

2. केंद्र सरकार ने राज्य की मदद कैसे की?
केंद्र ने अमरावती, पोलावरम और विशाखापत्तनम जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष अनुदान और 50 साल के ब्याज मुक्त ऋण दिए हैं।