कर्नाटक विधानसभा में सोमवार को भारी हंगामा हुआ, जहाँ भाजपा विधायकों ने ₹94 करोड़ के वाल्मीकि निगम घोटाले में कथित संलिप्तता के कारण मंत्री बी नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की।
- भाजपा विधायक मंत्री बी नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- यह विवाद वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से ₹94 करोड़ के गबन से जुड़ा है।
- विपक्ष के नेता आर अशोक ने चेतावनी दी है कि मंत्री की बर्खास्तगी तक मानसून सत्र बाधित रहेगा।
कर्नाटक विधानसभा सोमवार को एक युद्धक्षेत्र में बदल गई जब बीजेपी के नेतृत्व में विपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। हमले के केंद्र में नए नियुक्त मंत्री बी नागेंद्र थे, जिनकी कैबिनेट में वापसी ने वाल्मीकि निगम घोटाले के कारण राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।
विपक्ष के नेता आर अशोक ने सदन की गरिमा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछली सरकार ने स्वीकार किया था कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से ₹94 करोड़ का गबन हुआ था। अशोक ने सवाल उठाया कि जब एक व्यक्ति घोटाले में लिप्त है, तो उसे दोबारा मंत्री कैसे बनाया जा सकता है? उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक नागेंद्र को बर्खास्त नहीं किया जाता, भाजपा मानसून सत्र को चलने नहीं देगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह टकराव केवल एक मंत्री के बारे में नहीं है, बल्कि भाजपा द्वारा सिद्धरामैया सरकार को भ्रष्ट और अनुसूचित जनजातियों के प्रति उदासीन दिखाने की एक रणनीतिक चाल है। वाल्मीकि निगम घोटाले पर ध्यान केंद्रित करके, विपक्ष आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस को उसके पारंपरिक दलित और आदिवासी मतदाता आधार से अलग करने की कोशिश कर रहा है।
सदन की कार्यवाही तब और बिगड़ गई जब भाजपा विधायक सुनील कुमार ने प्रश्नकाल के दौरान हस्तक्षेप किया और एक "भ्रष्ट मंत्री" से जवाब लेने से इनकार कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल और विकास मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा द्वारा सदन के नियमों का हवाला देने और शांति बनाए रखने के प्रयासों के बावजूद, नारेबाजी और हंगामा जारी रहा।
एक ऐसे मंत्री की वापसी, जो करोड़ों के घोटाले से जुड़ा रहा हो, यह संदेश देता है कि सत्ता में बैठे लोगों को कानून का डर नहीं है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कम करता है।
यह हंगामा विधानसभा से निकलकर विधान परिषद तक पहुँच गया। भाजपा एमएलसी सी टी रवि ने आरोप लगाया कि यदि कांग्रेस ने एक घोटालेबाज मंत्री को वापस नियुक्त किया है, तो इसका मतलब है कि इसमें पार्टी हाईकमान की भी संलिप्तता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अनुसूचित जनजाति समुदाय के साथ विश्वासघात किया है।
ऐतिहासिक रूप से, वाल्मीकि निगम घोटाला कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा रहा है, जिसमें आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए निर्धारित धन को निजी बैंक खातों में स्थानांतरित करने का आरोप है। सीबीआई द्वारा बी नागेंद्र का नाम आने के बाद, भाजपा को सरकार की ईमानदारी पर सवाल उठाने का एक मजबूत मौका मिल गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाल्मीकि निगम घोटाला क्या है?
यह कर्नाटक में अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए निर्धारित लगभग ₹94 करोड़ के कथित गबन का मामला है।
बीजेपी बी नागेंद्र के खिलाफ विरोध क्यों कर रही है?
बीजेपी का आरोप है कि मंत्री बी नागेंद्र इस घोटाले में शामिल थे और उनका मंत्री बनना विधानसभा के सम्मान के खिलाफ है।